ECL ने भारतीय नौसेना को भेंट किया कबाड़ से बना अनोखा युद्धपोत मॉडल, ‘कचरे से कंचन’ की पहल!
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ECL News
ECL ने भारतीय नौसेना के सम्मान में विशेष युद्धपोत मॉडल भेंट किया।
खनन मशीनों के बेकार पुर्जों से तैयार किया गया यह मॉडल तकनीकी कौशल और रचनात्मकता का उदाहरण है।
‘कचरे से कंचन’ पहल के तहत पुनर्चक्रण और संसाधनों के पुनः उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
New Delhi / जिस कबाड़ को बेकार समझकर फेंक दिया जाता है, उसी से तैयार हुआ एक ऐसा युद्धपोत, जो देश की समुद्री सुरक्षा के लिए समर्पित भारतीय नौसेना के सम्मान का प्रतीक बन गया है। आखिर क्या है इस अनोखी कलाकृति की खासियत?
देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में भारतीय नौसेना के योगदान को सम्मान देने के लिए ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड यानी ECL ने एक अनूठी पहल की है। कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी और कोयला मंत्रालय के अधीन आने वाली ECL ने शुक्रवार को भारतीय नौसेना को युद्धपोत का एक विशेष मॉडल भेंट किया। खास बात यह है कि इस मॉडल को कोयला खनन में इस्तेमाल होने वाली मशीनों के बेकार पुर्जों से तैयार किया गया है।
यह मॉडल 1 बंगाल एनसीसी नौसेना इकाई, ग्रुप मुख्यालय एनसीसी कोलकाता ‘सी’ को भेंट किया गया। इसका उद्देश्य भारतीय नौसेना की देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा के प्रति अटूट प्रतिबद्धता और राष्ट्रसेवा में उसके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करना है।
इस अनोखी कलाकृति को ECL के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक डॉ. सतीश झा के मार्गदर्शन में तैयार किया गया है। यह कंपनी के ‘विशेष अभियान 6’ के अंतर्गत चलाई जा रही ‘कचरे से कंचन’ पहल का हिस्सा है। युद्धपोत के इस मॉडल को ECL की नियामतपुर केंद्रीय कार्यशाला में बेहद बारीकी और तकनीकी कुशलता के साथ तैयार किया गया।
इस पहल की खासियत यह है कि इसमें औद्योगिक कबाड़ को केवल दोबारा इस्तेमाल करने वाली सामग्री के रूप में नहीं देखा गया, बल्कि उसे राष्ट्रीय गौरव और सम्मान के प्रतीक में बदल दिया गया है। यह मॉडल ECL के कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता, रचनात्मकता और कारीगरी को भी प्रदर्शित करता है।
इस विशेष मॉडल को ECL के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक, कार्यात्मक निदेशकों और पूरे ECL परिवार की ओर से भारतीय नौसेना को भेंट किया गया। कंपनी के सुरक्षा प्रमुख मेजर एस. तिवारी ने नियामतपुर केंद्रीय कार्यशाला की प्रबंधक मानव संसाधन सुश्री निश्चल सोनी के साथ मिलकर यह प्रतिकृति भारतीय नौसेना के कमोडोर सीजर बसु और कमांडर संजीव सरन को सौंपी।
दरअसल, यह युद्धपोत मॉडल ‘कचरे से कंचन’ पहल के तहत तैयार की गई दस विशिष्ट प्रतिकृतियों में से एक है। इन सभी मॉडलों को ‘विशेष अभियान 6’ के दौरान तैयार किया गया है। प्रत्येक मॉडल के माध्यम से जनहित से जुड़े किसी न किसी विषय पर प्रतीकात्मक संदेश देने का प्रयास किया गया है।
ECL की यह पहल कचरा प्रबंधन, पुनर्चक्रण और संसाधनों के संरक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसके जरिए कंपनी यह संदेश दे रही है कि औद्योगिक कचरे को रचनात्मक सोच और तकनीकी कौशल के माध्यम से उपयोगी तथा अर्थपूर्ण कलाकृतियों में बदला जा सकता है। यह चक्रीय अर्थव्यवस्था और पर्यावरणीय स्थिरता के सिद्धांतों को भी प्रोत्साहित करता है।
इस पहल का एक भावनात्मक पक्ष भी है। एक ओर देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में कोयला खनिकों का योगदान है, तो दूसरी ओर समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में नौसेना के जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका है। दोनों ही अपने-अपने क्षेत्र में राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित हैं।
कोयला खदानों की गहराइयों से लेकर समुद्र के विशाल विस्तार तक, यह युद्धपोत मॉडल सेवा, समर्पण, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय गौरव की साझा भावना को दर्शाता है।