12वीं ब्रिक्स पर्यावरण बैठक: भारत ने जलवायु सहयोग और सतत विकास पर दिया जोर

Tue 18-Aug-2026,11:18 PM IST +05:30

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12वीं ब्रिक्स पर्यावरण बैठक: भारत ने जलवायु सहयोग और सतत विकास पर दिया जोर BRICS Environmental Meeting
  • जलवायु सहयोग: ब्रिक्स देशों ने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों से मिलकर निपटने पर जोर दिया।

  • चार प्राथमिकताएं: सतत जीवनशैली, वनाग्नि प्रबंधन, चक्रीय अर्थव्यवस्था और जलवायु अनुकूलन प्रमुख एजेंडा रहे।

  • संयुक्त वक्तव्य: बैठक में पर्यावरण संरक्षण और तकनीकी सहयोग को लेकर संयुक्त मंत्रिस्तरीय वक्तव्य अपनाया गया।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित 12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने, जैव विविधता संरक्षण और सतत विकास को लेकर सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर व्यापक चर्चा हुई। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों का स्वागत किया।

अपने संबोधन में श्री यादव ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस दृष्टि से निर्देशित है, जिसमें विकासशील देशों और वैश्विक दक्षिण की चिंताओं को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि भारत ब्रिक्स को सहयोग, स्थिरता और नवाचार के लिए एक प्रभावी मंच के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है, जिसमें जन-केंद्रित दृष्टिकोण और मानवता की भावना को सर्वोच्च महत्व दिया जा रहा है।

पर्यावरणीय चुनौतियों पर साझा प्रयास की जरूरत
केंद्रीय मंत्री ने जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता में कमी, प्रदूषण और आपदा जोखिम जैसी बढ़ती वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने विशेष रूप से विकासशील देशों की परिस्थितियों पर ध्यान देने की आवश्यकता बताई, जहां पर्यावरणीय असुरक्षा अक्सर व्यापक विकास संबंधी चुनौतियों से जुड़ी होती है।

श्री यादव ने वनाग्नि की रोकथाम, तैयारी, प्रारंभिक चेतावनी, प्रभावी प्रतिक्रिया और आग के बाद पुनर्स्थापन के क्षेत्रों में ब्रिक्स सहयोग मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने जलवायु वित्त, अनुकूलन और स्थानीय समुदायों को सशक्त बनाने को भी महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र का पुनर्स्थापन और मानव विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। भारत की मिशन LiFE और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जनभागीदारी और सामुदायिक स्वामित्व के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को व्यापक जनआंदोलन बनाया जा सकता है।

चार प्रमुख प्राथमिकताएं
भारत ने ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान पर्यावरण क्षेत्र में चार प्रमुख प्राथमिकताओं को सामने रखा है। इनमें संवहनीय जीवनशैली को बढ़ावा देना, वनरोपण एवं वन अग्नि प्रबंधन तथा आपदा से निपटने की क्षमता मजबूत करना, चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना और जलवायु अनुकूलन शामिल हैं।

श्री यादव ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान को साथ लाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि पर्यावरणीय समाधान वैज्ञानिक रूप से मजबूत होने के साथ-साथ स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप और सामाजिक रूप से समावेशी होने चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि 2031-2035 के लिए भारत का नया राष्ट्रीय निर्धारित योगदान समावेशी विकास और ऊर्जा सुरक्षा के साथ जलवायु परिवर्तन से निपटने की महत्वाकांक्षी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

संयुक्त मंत्रिस्तरीय वक्तव्य अपनाया गया
बैठक के अंत में ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों ने सर्वसम्मति से संयुक्त मंत्रिस्तरीय वक्तव्य अपनाया। इसके साथ चार महत्वपूर्ण ज्ञान संकलन और अपेक्षित परिणामों से जुड़े मसौदे सामने आए।

इनमें संवहनीय जीवनशैली के क्षेत्र में ज्ञान साझाकरण, अनुसंधान और नवाचार के लिए ब्रिक्स संस्थानों का नेटवर्क स्थापित करने का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा मरुस्थलीकरण से निपटने, सतत भूमि प्रबंधन और पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन के लिए एकीकृत प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन संबंधी ब्रिक्स सिद्धांत पर भी जोर दिया गया।

वनाग्नि से निपटने की तैयारी और प्रतिक्रिया तथा पारंपरिक ज्ञान आधारित जन-केंद्रित और समुदाय-आधारित जलवायु अनुकूलन से जुड़े सिद्धांत भी बैठक के प्रमुख परिणाम रहे।

जलवायु अनुकूलन और हरित विकास पर संवाद
बैठक में ‘जलवायु परिवर्तन पर ब्रिक्स उच्च स्तरीय संवाद’ आयोजित किया गया। इसमें जन-केंद्रित और समुदाय-आधारित जलवायु अनुकूलन पर चर्चा हुई। आधुनिक विज्ञान, तकनीक और नवाचार के साथ पारंपरिक ज्ञान तथा स्थानीय प्रथाओं को जोड़ने पर जोर दिया गया।

इसके अलावा एकीकृत भूदृश्य-आधारित हरियाली और सतत विकास पर भी सदस्य देशों ने अपने अनुभव साझा किए। इसका उद्देश्य सफल पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापन पहलों से सीख लेकर ब्रिक्स देशों के बीच ज्ञान और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना था।

मिशन LiFE पवेलियन रहा आकर्षण का केंद्र
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक डिजिटल और इंटरैक्टिव मिशन LiFE पवेलियन स्थापित किया। इसमें इमर्सिव गेमिंग और इंटरैक्टिव तकनीकों के माध्यम से भारत की प्रमुख पर्यावरणीय पहलों को प्रदर्शित किया गया।

दो दिवसीय बैठक के दौरान ब्रिक्स प्रतिनिधियों को भारतीय कलाकारों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखने का अवसर भी मिला। कार्यक्रम ने पर्यावरणीय सहयोग के साथ भारत की सांस्कृतिक विविधता और परंपराओं की भी झलक प्रस्तुत की।

बैठक में भारत ने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स देशों के बीच ज्ञान साझाकरण, तकनीकी आदान-प्रदान, प्रशिक्षण, नवाचार और संस्थागत सहयोग के माध्यम से पर्यावरणीय चुनौतियों का सामूहिक समाधान तलाशा जा सकता है।