Classical Languages India | 5 शास्त्रीय भाषाओं के लिए उत्कृष्टता केंद्र? असमिया से प्राकृत तक नई पहल को मंजूरी

Sat 03-Oct-2026,11:32 PM IST +05:30

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Classical Languages India | 5 शास्त्रीय भाषाओं के लिए उत्कृष्टता केंद्र? असमिया से प्राकृत तक नई पहल को मंजूरी Classical Languages India
  • पांच शास्त्रीय भाषाओं के लिए पांच उत्कृष्टता केंद्र स्थापित होंगे।

  • असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, ओडिशा और गुजरात में केंद्र बनाए जाएंगे।

  • अनुसंधान, संरक्षण, डिजिटलीकरण और भाषाई विरासत के प्रसार पर जोर रहेगा।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग ने शास्त्रीय असमिया, शास्त्रीय बंगाली, शास्त्रीय मराठी, शास्त्रीय पाली और शास्त्रीय प्राकृत के अध्ययन के लिए पांच उत्कृष्टता केंद्र यानी Centres of Excellence (CoE) स्थापित करने को मंजूरी दी है। इस पहल का उद्देश्य इन भाषाओं से जुड़ी समृद्ध भाषाई, साहित्यिक और ज्ञान परंपरा के अध्ययन, संरक्षण, डिजिटलीकरण और व्यापक प्रसार के लिए संस्थागत समर्थन उपलब्ध कराना है।

सरकार के अनुसार, इन उत्कृष्टता केंद्रों के जरिए शास्त्रीय भाषाओं में उन्नत अकादमिक अनुसंधान और छात्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, पुराने साहित्यिक और भाषाई संसाधनों के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और डिजिटलीकरण पर भी काम किया जाएगा। इससे भारत की पाठ्य और साहित्यिक विरासत को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इन पांच केंद्रों की स्थापना देश के अलग-अलग राज्यों के प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थानों में की जाएगी। शास्त्रीय असमिया के लिए तेजपुर विश्वविद्यालय, असम को चुना गया है। वहीं शास्त्रीय बंगाली के अध्ययन के लिए विश्वभारती विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किया जाएगा।

शास्त्रीय मराठी के लिए महाराष्ट्र के पुणे स्थित डेक्कन कॉलेज स्नातकोत्तर एवं अनुसंधान संस्थान (मानद विश्वविद्यालय) को जिम्मेदारी दी गई है। इसी तरह शास्त्रीय पाली के लिए केंद्रीय ओडिशा विश्वविद्यालय, ओडिशा और शास्त्रीय प्राकृत के लिए केंद्रीय गुजरात विश्वविद्यालय, गुजरात में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित होंगे।

इन केंद्रों का काम केवल भाषा अध्ययन तक सीमित नहीं रहेगा। इनके माध्यम से संबंधित शास्त्रीय भाषाओं में उन्नत शोध, विद्वतापूर्ण कार्य और अकादमिक संवाद के लिए संस्थागत मंच उपलब्ध कराया जाएगा। यानी शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को इन भाषाओं की साहित्यिक और ज्ञान परंपराओं पर व्यवस्थित अध्ययन का अवसर मिलेगा।

इस पहल का दूसरा बड़ा क्षेत्र संरक्षण और डिजिटलीकरण है। केंद्र भाषाई और साहित्यिक संसाधनों के दस्तावेजीकरण, संरक्षण तथा डिजिटल रूपांतरण को समर्थन देंगे। इससे भारत की प्राचीन और समृद्ध पाठ्य विरासत को व्यवस्थित तरीके से संरक्षित करने में मदद मिल सकती है।

इसके अलावा, इन केंद्रों का उद्देश्य शास्त्रीय भाषाओं से जुड़ी भाषाई, साहित्यिक और ज्ञान परंपराओं को व्यापक स्तर तक पहुंचाना भी है। सरकार की योजना के तहत इन भाषाओं से संबंधित अध्ययन और संसाधनों तक व्यापक पहुंच और प्रसार को बढ़ावा दिया जाएगा।

यह पहल असम, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, ओडिशा और गुजरात जैसे पांच राज्यों में क्षेत्रीय शैक्षणिक इकोसिस्टम को भी मजबूत करेगी। इन राज्यों में स्थापित होने वाले केंद्र शास्त्रीय भाषाओं में उच्च शिक्षा, अनुसंधान और छात्रवृत्ति के लिए नए संस्थागत आधार के रूप में काम करेंगे।

कुल मिलाकर, पांच उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना भारत की शास्त्रीय भाषाओं के अध्ययन, अनुसंधान, संरक्षण और प्रसार को संस्थागत रूप से मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे उच्च शिक्षण संस्थानों को शोध और छात्रवृत्ति के केंद्र के रूप में विकसित करने के साथ भारत की भाषाई और साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने के प्रयासों को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।