आर्थिक समीक्षा 2025-26: मवेशी, मत्स्य पालन और बागवानी ने कृषि को नई ऊंचाई दी
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Agriculture-Growth-India-2025-26
वर्ष 2024-25 में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 3,577.3 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा और बागवानी क्षेत्र में रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया गया।
पशुधन और मत्स्य पालन क्षेत्रों की जबरदस्त वृद्धि ने कृषि विकास को स्थिर किया और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को मजबूत किया।
Delhi/ केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश की। उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि और इसके सहयोगी क्षेत्र जैसे मवेशी, मत्स्य पालन, पोल्ट्री और बागवानी में निरंतर प्रगति हुई है। खाद्यान्न उत्पादन बढ़ा है, पशुधन और मत्स्य पालन क्षेत्र में जबरदस्त वृद्धि हुई है और बागवानी क्षेत्र में रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया गया है। ये सभी उपलब्धियां ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में अहम योगदान दे रही हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि कृषि एवं इसके सहयोगी क्षेत्रों की औसत वार्षिक विकास दर (सीएजीआर) पिछले पांच वर्षों में 4.4 प्रतिशत रही। वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3.5 प्रतिशत रही। दशकीय वृद्धि दर (2016-2025) 4.45 प्रतिशत दर्ज की गई, जो पिछले दशकों में सबसे अधिक है। मवेशी क्षेत्र ने 7.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की जबकि मत्स्य पालन क्षेत्र ने 8.8 प्रतिशत की वृद्धि की। फसल क्षेत्र में 3.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई।
पशुधन क्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2015-2024 के दौरान सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में लगभग 195 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सीएजीआर वर्तमान मूल्य पर 12.77 प्रतिशत रही। मत्स्य पालन क्षेत्र ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया, जहां 2014-2025 के दौरान मछली उत्पादन 140 प्रतिशत बढ़कर 88.14 लाख टन हुआ। कृषि के सहयोगी क्षेत्र ग्रामीण आय और रोजगार के लिए मुख्य वाहक बनकर उभरे हैं।
भारत के खाद्यान्न उत्पादन में भी लगातार वृद्धि हुई है। वर्ष 2024-25 में उत्पादन 3,577.3 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा, जो पिछले वर्ष से 254.3 एलएमटी अधिक है। यह वृद्धि चावल, गेहूं, मक्का और मोटे अनाजों की उच्च उपज के कारण संभव हुई।
बागवानी क्षेत्र में उत्पादन 362.08 मिलियन टन तक पहुंच गया। फलों का उत्पादन 114.51 मिलियन टन, सब्जियों का 219.67 मिलियन टन और अन्य बागवानी आधारित फसलों का उत्पादन 33.54 मिलियन टन रहा। 2013-14 में 280.70 मिलियन टन से बढ़कर वर्ष 2024-25 में 367.72 मिलियन टन तक बागवानी उत्पादन बढ़ा।
भारत विश्व का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक बन गया है और वैश्विक उत्पादन में 25 प्रतिशत योगदान कर रहा है। सब्जियों, फलों और आलू में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जो हर श्रेणी में 12-13 प्रतिशत योगदान देता है। यह उपलब्धियां बागवानी क्षेत्र में भारत की स्थिति, वैश्विक खाद्य मांग और उच्च मूल्य वाली फसलों के उत्पादन क्षमता को दर्शाती हैं।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि कृषि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की केंद्रीय भूमिका निभाएगी। डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन और बागवानी ने ग्रामीण आजीविका, खाद्य सुरक्षा, निर्यात और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सरकार ने आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज, सिंचाई और मार्केटिंग नेटवर्क के माध्यम से किसानों को समर्थन दिया।
आर्थिक समीक्षा में यह भी कहा गया कि कृषि और सहयोगी क्षेत्रों की निरंतर वृद्धि समावेशी विकास और देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान सुनिश्चित करती है। यह क्षेत्र न केवल ग्रामीण रोजगार बढ़ा रहे हैं बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की कृषि ताकत को मजबूती दे रहे हैं।