हरियाली अमावस्या पर 31 राज्यों में 50 हजार से ज्यादा पौधे लगाए, ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान तेज

Wed 12-Aug-2026,03:57 PM IST +05:30

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हरियाली अमावस्या पर 31 राज्यों में 50 हजार से ज्यादा पौधे लगाए, ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान तेज Hariyali Amavasya
  • 31 राज्यों में 50 हजार से अधिक पौधारोपण।

  • “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान को मिला बढ़ावा।

  • पौधारोपण के साथ पौधों की देखभाल पर जोर।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / हरियाली अमावस्या के अवसर पर देशभर में पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए बड़े पैमाने पर पौधारोपण अभियान चलाया गया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में “वृक्ष मित्र परिवार” के साथ मिलकर 31 राज्यों में 50 हजार से अधिक पेड़ लगाए गए। अभियान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “एक पेड़ माँ के नाम” आह्वान से भी जोड़ा गया। दिल्ली में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में मंत्री, सांसद, अधिकारी, किसान, युवा और बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए।

दिल्ली के पीबीजी ग्राउंड, सेंट्रल रेंज, तालकटोरा स्टेडियम के पास आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत पौधों में जल अर्पित करने और वंदे मातरम् के साथ हुई। इसके बाद सामूहिक रूप से पौधारोपण किया गया। अभियान का विस्तार दिल्ली से बाहर गांवों, कस्बों, पंचायतों और विभिन्न संस्थानों तक रहा, जहां लोगों ने पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ पौधे लगाए।

हरियाली अमावस्या को जनभागीदारी से जोड़ने पर जोर
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हरियाली अमावस्या केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। भारतीय संस्कृति में मनुष्य, पशु-पक्षी, नदियां, पर्वत और पेड़-पौधों को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ माना गया है। उन्होंने कहा कि पौधा लगाना केवल हरियाली बढ़ाने का काम नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में कदम है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि प्रत्येक नागरिक साल में कम से कम एक पेड़ लगाए और अपने साथ पांच अन्य लोगों को भी इस अभियान से जोड़े। उन्होंने जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, बच्चों के जन्म और माता-पिता की पुण्य स्मृति जैसे अवसरों को “वृक्ष पर्व” के रूप में मनाने का सुझाव दिया।

चौहान ने पंचायतों, नगर निकायों और संस्थानों से पौधारोपण के लिए निर्धारित स्थान विकसित करने की अपील की, ताकि लगाए गए पौधों की सुरक्षा और नियमित देखभाल सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल पौधा लगाना पर्याप्त नहीं है, उसकी देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

खेती और पर्यावरण के बीच सीधा संबंध
केंद्रीय मंत्री ने पर्यावरण संरक्षण को कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ते हुए कहा कि पर्यावरण में असंतुलन का सीधा असर खेती, पानी, मिट्टी और मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है। किसानों के लिए बीज और खाद के साथ पानी की उपलब्धता तथा जमीन की सेहत भी महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।

उन्होंने मिशन लाइफ, ऊर्जा संरक्षण और प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली अपनाने की जरूरत पर जोर दिया। उनके अनुसार, प्रकृति का अंधाधुंध शोषण समाधान नहीं है। विकास और प्राकृतिक संसाधनों के बीच संतुलन बनाकर उनका उपयोग तथा संरक्षण ही टिकाऊ भविष्य का रास्ता है।

दिल्ली में एक लाख से अधिक लोगों को जोड़ने का दावा
दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान की पर्यावरण संरक्षण मुहिम से दिल्ली सरकार को भी प्रेरणा मिली है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में एक लाख से अधिक लोगों को अभियान से जोड़ने का प्रयास किया गया है। स्कूल, कॉलेज और अन्य संस्थानों को भी पौधारोपण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

सिरसा ने कहा कि नागरिक पर्यावरण संरक्षण का महासंकल्प लेकर लगातार इस अभियान से जुड़ रहे हैं। वहीं दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा ने “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन भी उतना ही आवश्यक है।

पौधा लगाने के साथ संरक्षण की जिम्मेदारी
कार्यक्रम में सांसद दर्शन सिंह चौधरी, विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि, कृषि विश्वविद्यालयों के अधिकारी, ICAR, DARE, KVKs के कर्मचारी और बड़ी संख्या में “वृक्ष मित्र परिवार” के सदस्य मौजूद रहे।

अभियान का उद्देश्य केवल एक दिन में बड़ी संख्या में पौधे लगाना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ना है। कार्यक्रम में बार-बार इस बात पर जोर दिया गया कि पौधा लगाने के बाद उसकी नियमित देखभाल ही वास्तविक पर्यावरण संरक्षण है।

“वृक्ष मित्र परिवार” के सदस्य अपने-अपने क्षेत्रों में इस अभियान को आगे बढ़ाने और लोगों को पौधारोपण के साथ पौधों की जिम्मेदारी लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। हरियाली अमावस्या के मौके पर शुरू हुआ यह संदेश प्रकृति, खेती, जल और आने वाली पीढ़ियों के बीच संतुलन कायम करने की दिशा में सामूहिक जिम्मेदारी को रेखांकित करता है।