विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला संपन्न, 30 अरब डॉलर निर्यात लक्ष्य पर सरकार का बड़ा फोकस

Tue 09-Jun-2026,10:34 PM IST +05:30

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विशाखापत्तनम में राष्ट्रीय समुद्री खाद्य निर्यात कार्यशाला संपन्न, 30 अरब डॉलर निर्यात लक्ष्य पर सरकार का बड़ा फोकस Seafood Export
  • अगले पांच वर्षों में 30 अरब डॉलर समुद्री खाद्य निर्यात का लक्ष्य।

  • मूल्यवर्धन, कोल्ड-चेन और निर्यात अवसंरचना पर विशेष जोर।

  • समुद्री शैवाल, गहरे समुद्र मत्स्य पालन और स्टार्टअप्स पर चर्चा।

Andhra Pradesh / Visakhapatnam :

Visakhapatnam / भारत के समुद्री खाद्य निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने मत्स्य पालन विभाग और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सहयोग से 5-6 जून 2026 को विशाखापत्तनम में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला में समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाने, मूल्यवर्धन, स्थिरता, बाजार विस्तार, नवाचार और आधुनिक अवसंरचना विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।

कार्यशाला में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान सहित कई वरिष्ठ नेताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि पिछले दस वर्षों में भारत के समुद्री उत्पादों के निर्यात मूल्य में लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वैश्विक समुद्री खाद्य व्यापार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 4 प्रतिशत है, लेकिन सरकार और उद्योग जगत मिलकर अगले पांच वर्षों में इसे 30 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य लेकर काम कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक समुद्री उत्पादों के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि उनका राज्य देश के समुद्री खाद्य निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने आंध्र प्रदेश को टिकाऊ जलीय कृषि और समुद्री खाद्य निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, मजबूत अवसंरचना और प्रभावी ब्रांडिंग के जरिए राज्य इस क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर रहा है।

केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बताया कि भारत का मछली उत्पादन वर्ष 2012-13 के 95.8 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में लगभग 198 लाख टन तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत का समुद्री खाद्य निर्यात करीब 73,890 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। जमे हुए झींगे आज भी भारत के सबसे बड़े समुद्री खाद्य निर्यात उत्पाद बने हुए हैं।

कार्यशाला में लॉजिस्टिक्स, कोल्ड-चेन, ट्रेसिबिलिटी सिस्टम, गुणवत्ता प्रमाणन, निर्यात बाजारों के विविधीकरण और टिकाऊ मत्स्य पालन जैसी चुनौतियों और अवसरों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने गहरे समुद्र में मत्स्य पालन, समुद्री शैवाल उत्पादन, सजावटी मत्स्य पालन और ट्राउट फार्मिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह-योजना, किसान क्रेडिट कार्ड और अन्य सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को सहायता भी वितरित की गई। कार्यशाला के समापन पर सभी हितधारकों ने समुद्री खाद्य क्षेत्र में स्थिरता, मूल्यवर्धन, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता दोहराई। माना जा रहा है कि यहां हुई चर्चाएं भारत को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में समुद्री खाद्य निर्यात क्षेत्र में नई गति प्रदान करेंगी।