गांधीनगर में आत्मनिर्भर पंचायत कार्यशाला आयोजित, विकसित भारत 2047 के लिए आर्थिक रूप से सशक्त ग्राम पंचायतों पर जोर

Tue 09-Jun-2026,11:14 PM IST +05:30

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गांधीनगर में आत्मनिर्भर पंचायत कार्यशाला आयोजित, विकसित भारत 2047 के लिए आर्थिक रूप से सशक्त ग्राम पंचायतों पर जोर Gandhinagar Workshop
  • गांधीनगर में आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम पर आउटरीच कार्यशाला आयोजित।

  • पंचायतों की स्वयं की आय (OSR) बढ़ाने और वित्तीय आत्मनिर्भरता पर जोर।

  • विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में ग्राम पंचायतों की अहम भूमिका रेखांकित।

Gujarat / Gandhinagar :

Gandhinagar / ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और महत्वपूर्ण पहल की है। पंचायती राज मंत्रालय ने गुजरात सरकार के सहयोग से गांधीनगर में "आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम" पर एक विशेष आउटरीच कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और विकास क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।

कार्यशाला का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें अपने संसाधनों के जरिए राजस्व अर्जित करने के लिए प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम में 100 से अधिक प्रतिभागी प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुए, जबकि 300 से ज्यादा लोग ऑनलाइन जुड़े। इनमें कई ऐसे पंचायत प्रतिनिधि भी शामिल थे जिन्होंने अपनी पंचायतों में "ओन सोर्स रेवेन्यू" यानी स्वयं के संसाधनों से आय बढ़ाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने अपने संबोधन में कहा कि आत्मनिर्भर पंचायतें ही आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 के सपने को साकार कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि पंचायतें केवल स्थानीय प्रशासनिक इकाइयां नहीं हैं, बल्कि देश के सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन की मजबूत नींव हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से अपील की कि वे नए विचारों और नवाचारों के साथ अपने क्षेत्रों में विकास के नए अवसर पैदा करें।

गुजरात सरकार के पंचायत, ग्रामीण आवास एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव धनंजय द्विवेदी ने कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा गांवों से होकर गुजरती है। उन्होंने पंचायतों को सरकारी अनुदानों पर निर्भरता कम कर अपने संसाधनों से आय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही सफल पंचायतों के मॉडल को अपनाने और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया।

कार्यक्रम में नाबार्ड और हुडको के प्रतिनिधियों ने भी पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में संस्थागत सहयोग का भरोसा दिया। नाबार्ड के अधिकारियों ने कहा कि ग्रामीण विकास और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए पंचायतों को व्यवहारिक और राजस्व उत्पन्न करने वाली परियोजनाओं पर काम करना चाहिए। वहीं हुडको ने बुनियादी ढांचे के विकास और क्षमता निर्माण में सहयोग देने की बात कही।

कार्यशाला के दौरान "आत्मनिर्भर पंचायत पोर्टल" का लाइव प्रदर्शन भी किया गया। प्रतिभागियों को बताया गया कि इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पंचायतें अपनी परियोजनाओं को तैयार कर सकेंगी, तकनीकी सहायता प्राप्त कर सकेंगी और विभिन्न वित्तीय स्रोतों से जुड़ सकेंगी।

आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायतों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है ताकि वे अपनी आय बढ़ाने वाली परियोजनाएं विकसित कर सकें। इसके तहत चुनी गई पंचायतों को तकनीकी मार्गदर्शन, पीपीपी मॉडल, सीएसआर फंडिंग, बैंक ऋण और सरकारी योजनाओं से जोड़ने में मदद दी जाएगी। ग्राम सभा की सहमति के साथ तैयार होने वाली परियोजनाओं को बैंक योग्य बनाया जाएगा ताकि उनका सफल क्रियान्वयन हो सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्यक्रम गांवों को केवल विकास का केंद्र ही नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता का मॉडल भी बनाएगा। यदि पंचायतें अपने संसाधनों का बेहतर उपयोग करें और स्थानीय स्तर पर राजस्व बढ़ाने में सफल हों, तो ग्रामीण भारत की तस्वीर आने वाले वर्षों में पूरी तरह बदल सकती है।