भारत की स्वच्छ ऊर्जा में बड़ी छलांग! 300 गीगावाट पार, कैसे बदल रही है देश की ऊर्जा तस्वीर?

Thu 05-Nov-2026,06:54 PM IST +05:30

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भारत की स्वच्छ ऊर्जा में बड़ी छलांग! 300 गीगावाट पार, कैसे बदल रही है देश की ऊर्जा तस्वीर? India Renewable Energy 2026
  • भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित विद्युत क्षमता 300 गीगावाट के पार पहुंच गई है।

  • पीएम सूर्य घर योजना से 65 लाख से अधिक परिवार और पीएम-कुसुम योजना से लगभग 30 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं।

  • भारत ने 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन हासिल करने का लक्ष्य रखा है।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / क्या कोई देश तेजी से आर्थिक विकास कर सकता है और साथ ही प्रदूषण फैलाने वाले ईंधनों पर अपनी निर्भरता भी घटा सकता है? भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी उपलब्धियों से इस सवाल का जवाब दिया है। आखिर कैसे बदल रही है देश की ऊर्जा तस्वीर?

भारत में स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार अब केवल पर्यावरण संरक्षण का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक विकास, रोजगार और आम लोगों के जीवन से भी जुड़ता जा रहा है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित भारत नवीकरणीय ऊर्जा शिखर सम्मेलन एवं एक्सपो 2026 के समापन सत्र में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने भारत की इसी उपलब्धि को रेखांकित किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने दिखाया है कि पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता आर्थिक विकास में बाधा नहीं, बल्कि विकास को गति देने वाली ताकत बन सकती है। उन्होंने बताया कि भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित विद्युत क्षमता 300 गीगावाट के पार पहुंच गई है। इतना ही नहीं, वर्ष 2025 में देश ने अपनी कुल स्थापित विद्युत क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से प्राप्त करने का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले ही हासिल कर लिया। 

सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। पिछले एक दशक में देश की सौर ऊर्जा स्थापित क्षमता तीन गीगावाट से भी कम स्तर से बढ़कर 170 गीगावाट से अधिक हो गई है। उपराष्ट्रपति के अनुसार, कभी सौर बिजली कोयले से बनने वाली बिजली की तुलना में कई गुना महंगी थी, लेकिन आज यह भारत में बिजली के सबसे सस्ते स्रोतों में शामिल है। इसके पीछे मजबूत नीतियों, निजी क्षेत्र और राज्यों के सामूहिक प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

उन्होंने हाइड्रोजन ऊर्जा के क्षेत्र में हो रही प्रगति पर भी भरोसा जताया। उनका कहना है कि विज्ञान और तकनीक में लगातार सुधार से आने वाले वर्षों में हाइड्रोजन ऊर्जा अधिक किफायती हो सकती है। उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग मजबूत करने पर भी जोर दिया। स्वच्छ ऊर्जा का लाभ आम परिवारों और किसानों तक पहुंचाने के लिए सरकार की योजनाओं का भी उल्लेख किया गया। उपराष्ट्रपति ने बताया कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से 65 लाख से अधिक परिवार जुड़ चुके हैं। 

वहीं, पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत लगभग 30 लाख किसानों को लाभ मिला है। सौर पंपों से किसानों को डीजल पर होने वाले खर्च में बचत और अतिरिक्त आय के अवसर मिल सकते हैं। इस तरह किसान अन्नदाता के साथ ऊर्जादाता भी बन सकते हैं।

उन्होंने पीएम-जनमन और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के माध्यम से दूरदराज के जनजातीय क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने के प्रयासों को भी महत्वपूर्ण बताया। बिजली की उपलब्धता से शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार के अवसरों का विस्तार होता है। उपराष्ट्रपति ने मिशन लाइफ का उल्लेख करते हुए लोगों से ऊर्जा की बचत, जिम्मेदार उपभोग और कचरे के उचित निपटान जैसी आदतें अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन केवल सरकार का अभियान नहीं, बल्कि जनभागीदारी से आगे बढ़ने वाला आंदोलन होना चाहिए।

भारत ने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन हासिल करने का संकल्प लिया है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि आने वाले वर्षों में बिजली की मांग बढ़ेगी, इसलिए स्वच्छ, विश्वसनीय और किफायती ऊर्जा की व्यवस्था करना जरूरी होगा। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सम्मेलन में हुई चर्चाओं को ठोस परियोजनाओं और बिजली उत्पादन में बदलने का आह्वान किया। इस अवसर पर नवीकरणीय ऊर्जा और पीएम सूर्य घर योजना में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कार भी प्रदान किए गए।