थायरॉइड केवल बीमारी नहीं, राष्ट्रीय उत्पादकता की चुनौती: डॉ. जितेंद्र सिंह

Mon 09-Feb-2026,06:32 PM IST +05:30

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थायरॉइड केवल बीमारी नहीं, राष्ट्रीय उत्पादकता की चुनौती: डॉ. जितेंद्र सिंह Thyroid-Disorders-National-Productivity-Dr-Jitendra-Singh
  • थायरॉइड विकार भारत की युवा आबादी की उत्पादकता, ऊर्जा स्तर और दीर्घकालिक आर्थिक विकास को सीधे प्रभावित करने वाली राष्ट्रीय चुनौती बनते जा रहे हैं।

  • सरकार अनुसंधान, बायोटेक्नोलॉजी और स्वदेशी चिकित्सा नवाचारों के जरिए थायरॉइड सहित गैर-संक्रामक रोगों से निपटने पर जोर दे रही है।

Chandigarh / Chandigarh :

चंडीगढ़/ केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने थायरॉइड विकारों को केवल एक चिकित्सीय समस्या मानने के बजाय इसे राष्ट्रीय विकास से जुड़ी गंभीर चुनौती बताया है। उन्होंने कहा कि थायरॉइड जैसी बीमारियां देश की मानव उत्पादकता, युवा कार्यबल की क्षमता और दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति को प्रभावित करती हैं। चंडीगढ़ में इंडियन थायराइड सोसाइटी के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने समय पर जांच, अनुसंधान और जन-जागरूकता को बेहद जरूरी बताया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत जैसे युवा देश में, जहां 70 प्रतिशत से अधिक आबादी 40 वर्ष से कम उम्र की है, बिना निदान वाले थायरॉइड विकार विशेषकर हाइपोथायरायडिज्म ऊर्जा स्तर और कार्यक्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 4 करोड़ भारतीय थायरॉइड संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं, जिनमें से बड़ी संख्या को इसका पता तक नहीं चलता।

उन्होंने गर्भावस्था के दौरान थायरॉइड की जांच न होने के खतरों पर विशेष जोर दिया। समय पर निदान न होने से बच्चों में जन्मजात हाइपोथायरायडिज्म और स्थायी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जो आने वाली पीढ़ी की क्षमता को कमजोर कर सकती हैं।

सम्मेलन में देशभर से आए एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, परमाणु चिकित्सा विशेषज्ञ और शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि मधुमेह और मोटापे की तुलना में थायरॉइड विकारों को कम गंभीरता से लिया जाता है, जबकि इनका प्रभाव कहीं अधिक व्यापक है। उन्होंने बहु-विषयक सहयोग, जीवन विज्ञान और चिकित्सा अनुसंधान के एकीकृत दृष्टिकोण पर बल दिया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार द्वारा पिछले एक दशक में किए गए वैज्ञानिक सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि अनुसंधान को प्रयोगशाला से बाजार तक ले जाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण से ही उद्योग की भागीदारी से चिकित्सा नवाचारों की स्थिरता और प्रभाव बढ़ता है।

उन्होंने केंद्रीय बजट में घोषित बायोफार्मा शक्ति मिशन का हवाला देते हुए कहा कि स्वदेशी दवाओं और चिकित्सा उपकरणों के विकास के लिए मजबूत आधार तैयार किया गया है। भारत की पहली स्वदेशी एंटीबायोटिक, जीन थेरेपी और डीएनए वैक्सीन जैसी उपलब्धियों को उन्होंने आत्मनिर्भर स्वास्थ्य प्रणाली की दिशा में बड़ा कदम बताया।

डॉ. सिंह ने राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन और 1 लाख करोड़ रुपये के अनुसंधान ढांचे को भारत के वैज्ञानिक भविष्य की रीढ़ बताया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर केवल चिकित्सक नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माता हैं, जो समय पर निदान और उपचार से देश की मानव पूंजी को सशक्त बनाते हैं।