दुबई में फंसे झारखंड के मजदूर
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दुबई में फंसे झारखंड के 14 प्रवासी मजदूरों के पासपोर्ट जब्त, वेतन न मिलने से मानवीय संकट गहराया
मजदूरों ने सुरक्षित स्वदेश वापसी के लिए राज्य सरकार और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई
jharkhand/ झारखंड के प्रवासी मजदूरों से जुड़े एक गंभीर मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गिरिडीह, हजारीबाग और बोकारो जिलों के कम से कम 14 मजदूर दुबई में फंसे हुए हैं, जहां एक निजी कंपनी ने कथित तौर पर उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए और वेतन का भुगतान रोक दिया। आयोग ने इसे संभावित मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई शुरू की है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने झारखंड के मुख्य सचिव और झारखंड प्रवासी श्रमिक नियंत्रण कक्ष (MWCR) के प्रमुख को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग का कहना है कि यदि मीडिया रिपोर्टों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मानव गरिमा और श्रम अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये मजदूर दुबई में एक ट्रांसमिशन लाइन निर्माण परियोजना में कार्यरत थे। आरोप है कि कंपनी ने उन्हें भारत से दुबई लाने के खर्च की भरपाई के नाम पर वेतन का बड़ा हिस्सा काट लिया। इतना ही नहीं, मजदूरों से रहने का खर्च भी वसूला जा रहा है, जिससे उनके पास भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुएं खरीदने तक के पैसे नहीं बचे हैं। सबसे गंभीर आरोप यह है कि कंपनी ने मजदूरों के पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिए हैं, ताकि वे भारत वापस न लौट सकें। यह अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों और मानवाधिकार कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन माना जाता है।
मजदूरों ने फोन के जरिए अपनी आपबीती साझा करते हुए झारखंड सरकार से सुरक्षित स्वदेश वापसी की अपील की है। एनएचआरसी ने राज्य सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि मजदूरों की सहायता और उनकी वापसी के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। इस मामले ने एक बार फिर विदेशों में काम करने वाले भारतीय मजदूरों की सुरक्षा, निगरानी और ठोस नीतियों की जरूरत को उजागर कर दिया है।