राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की स्वर्ण जयंती
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मुख्यमंत्री और केंद्रीय आयुष मंत्री की मौजूदगी में एनआईए को वैश्विक आयुर्वेद केंद्र बनाने की दिशा में नई योजनाओं और अधोसंरचना का शुभारंभ हुआ।
धनवंतरी उपवन, सुश्रुत भवन और डिजिटल पॉडकास्ट स्टूडियो जैसी पहलें आयुर्वेद को आधुनिक और सुलभ स्वास्थ्य प्रणाली बनाने की दिशा में अहम कदम हैं।
Jaipur/ राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (एनआईए), जयपुर ने अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर स्वर्ण जयंती समारोह का भव्य आयोजन किया। 1976 में एक साधारण आयुर्वेद महाविद्यालय के रूप में स्थापित यह संस्थान आज देश का पहला आयुर्वेद डीम्ड विश्वविद्यालय बन चुका है और आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान, रोगी देखभाल, पांडुलिपि विज्ञान एवं प्रशिक्षण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव, राजस्थान के उपमुख्यमंत्री एवं आयुष मंत्री श्री प्रेमचंद बैरवा सहित आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद, शोधकर्ता और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच एक सशक्त सेतु है। उन्होंने कहा कि संस्थान के 50 वर्ष पूरे होना केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि जन स्वास्थ्य के प्रति समर्पित सेवा और अनुसंधान की निरंतर यात्रा का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने राजस्थान को आयुर्वेद की ऐतिहासिक भूमि बताते हुए कहा कि राज्य सरकार आयुष प्रणालियों को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने एनआईए के शैक्षणिक उत्कृष्टता, अनुसंधान क्षमता और बुनियादी ढांचे के विस्तार की सराहना करते हुए संस्थान को भविष्य में वैश्विक आयुर्वेद केंद्र के रूप में विकसित करने हेतु राज्य सरकार के पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
केंद्रीय आयुष मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि एनआईए की 50 वर्षों की यात्रा आयुर्वेद के संरक्षण और विकास के लिए समर्पित विद्वानों और चिकित्सकों के अथक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आयुष प्रणालियों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढांचे में सुदृढ़ रूप से एकीकृत किए जाने का उल्लेख किया।
उन्होंने तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना और जामनगर स्थित डब्ल्यूएचओ के वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा केंद्र को इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। श्री जाधव ने कहा कि सरकार आयुष को साक्ष्य-आधारित, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य स्वास्थ्य प्रणाली बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
राजस्थान के उपमुख्यमंत्री श्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि एनआईए की स्वर्ण जयंती राज्य और देश दोनों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने आश्वासन दिया कि राजस्थान सरकार संस्थान को विश्व-स्तरीय आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान केंद्र के रूप में विकसित करने में निरंतर सहयोग देगी।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ने कई नई सुविधाओं का उद्घाटन किया। इनमें औषधीय पौधों के संरक्षण हेतु ‘धनवंतरी उपवन’, उन्नत सिमुलेशन प्रयोगशाला, नया ऑपरेशन थिएटर ब्लॉक, बाह्य रोगी सेवाओं के लिए ‘सुश्रुत भवन’ तथा एनआईए पॉडकास्ट स्टूडियो का शुभारंभ शामिल रहा। इन पहलों से संस्थान की नैदानिक, शैक्षणिक और डिजिटल क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। समारोह का समापन एनआईए को आयुर्वेद, डिजिटल स्वास्थ्य नवाचार और साक्ष्य-आधारित पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।