नेपाल-तिब्बत बाढ़ में 469 मौतें, 1468 लापता; 290 भारतीयों से संपर्क नहीं

Fri 28-Aug-2026,02:57 PM IST +05:30

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नेपाल-तिब्बत बाढ़ में 469 मौतें, 1468 लापता; 290 भारतीयों से संपर्क नहीं Bhotekoshi River
  • नेपाल-तिब्बत बाढ़ में मृतकों की संख्या 469 पहुंची, जबकि 1,468 लोग लापता हैं।

  • 290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया, 84 भारतीयों को अब तक बचाया गया।

  • भोटेकोशी नदी में नई अवरोधक झील बनने से दोबारा बाढ़ का खतरा बढ़ा।

Central Region / Kathmandu :

Kathmandu / नेपाल और तिब्बत में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। गुरुवार तक इस आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई, जबकि नेपाल और तिब्बत में कुल 1,468 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। राहत और बचाव दल लगातार मलबे, नदी किनारों और प्रभावित इलाकों में लोगों की तलाश कर रहे हैं। इस बीच नेपाल में लापता लोगों में 290 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं।

नेपाल पुलिस के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक बड़ी संख्या में लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें 50 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जिन्हें हेलीकॉप्टर के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया। इसके अलावा सड़क मार्ग से भी सैकड़ों लोगों को निकाला गया है। हालांकि, कई दुर्गम इलाकों में सड़कें और पुल बह जाने के कारण राहत अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

ग्लेशियर टूटने से आई तबाही
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने, चट्टानों के खिसकने और हिमस्खलन के बाद पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव निचले इलाकों की ओर आया। भोटेकोशी नदी प्रणाली में आए इस अचानक उफान ने कई कस्बों और गांवों को प्रभावित किया। बड़ी संख्या में मकान, वाहन, सड़कें और पुल बह गए। कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

सबसे बड़ी चिंता अब भी लापता लोगों को लेकर है। नेपाल में 910 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई है, जबकि तिब्बत में 558 लोग लापता बताए गए हैं। बचाव दल लगातार नदी घाटियों और मलबे वाले क्षेत्रों में तलाश अभियान चला रहे हैं।

290 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं
भारत ने भी अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के प्रयास तेज कर दिए हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 290 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। अब तक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 63 श्रमिक और कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं।

इसके अलावा तिब्बत में मौजूद करीब 200 भारतीय नागरिकों ने सहायता की मांग की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अधिकारियों और भारत के राजदूतों के साथ बैठक कर भारतीय नागरिकों की स्थिति की समीक्षा की। भारत सरकार नेपाल के अधिकारियों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटरों और अन्य एजेंसियों के साथ लगातार संपर्क में है।

भारत ने भेजी राहत सामग्री
भारत ने नेपाल के लिए राहत सहायता भी बढ़ा दी है। बुधवार को करीब 10 टन मानवीय सहायता एवं आपदा राहत सामग्री भेजने के बाद गुरुवार को एक सैन्य परिवहन विमान से 37.5 टन अतिरिक्त राहत सामग्री, दवाएं और खाद्य सामग्री भेजी गई। इस तरह भारत अब तक कुल 47.5 टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका है।

फिर बढ़ा बाढ़ का खतरा
बाढ़ की पहली तबाही के बाद अब एक नई चिंता पैदा हो गई है। भोटेकोशी नदी के ऊपरी हिस्से में एक नई अवरोधक झील बनने की सूचना है। अधिकारियों के अनुसार, झील में तेजी से पानी जमा हो रहा है। यदि प्राकृतिक अवरोध टूटता है तो निचले इलाकों में दोबारा अचानक बाढ़ आ सकती है।

नेपाल के जल विज्ञान और मौसम विज्ञान विभाग ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और नदी किनारों से दूर रहने की सलाह दी है। चीन की ओर से भी झील की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

सड़क और बिजली ढांचे को भारी नुकसान
बाढ़ के कारण नुवाकोट से रसुवागढ़ी तक कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार 35 सड़क पुल, 45 झूला पुल और करीब 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। जलविद्युत परियोजनाओं और बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है।

नेपाल सेना, नेपाल पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय स्वयंसेवक हेलीकॉप्टर, ड्रोन और जमीनी टीमों की मदद से लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रहे हैं। चितवन समेत कई जिलों में बड़ी संख्या में शव बरामद किए गए हैं। अस्पतालों में परिजन अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश कर रहे हैं।

इस बीच नेपाल और चीन दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत अभियानों की समीक्षा की है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों को ढूंढना, प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना और संभावित दूसरी बाढ़ के खतरे से लोगों को बचाना है।