नेपाल बाढ़: 883 लोगों का रेस्क्यू, 100 से ज्यादा टनल में फंसे; फिर बढ़ा भोटेकोशी का खतरा
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Nepal Flood News
रसुवा में टनल से 350 लोगों को सुरक्षित निकाला गया।
नेपाली सेना ने कुल 883 लोगों का रेस्क्यू किया।
भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी के किनारे फिर बाढ़ का खतरा।
Kathmandu / नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। रसुवा जिले में नेपाली सेना ने अपर त्रिशूली हाइड्रोपावर की टनल में फंसे 350 मजदूरों और स्थानीय लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इनमें 63 भारतीय नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। तेज बहाव, खराब मौसम और बाढ़ से प्रभावित दुर्गम इलाकों के बीच सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।
नेपाली सेना के अनुसार, टनल के अंदर अभी भी 100 से अधिक लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास जारी हैं। इस रेस्क्यू ऑपरेशन की कमान त्रिशूली स्थित नंबर-1 सेकेंड मूवमेंट टैक्टिकल हेडक्वार्टर के वारंट ऑफिसर भक्तजन बसनेट संभाल रहे हैं। वहीं, धुंचे स्थित एसक्यूआर बैरक से सेकेंड लेफ्टिनेंट अभिषेक शाही के नेतृत्व में एक अन्य बचाव दल को भी अभियान में लगाया गया है।
इस टीम ने स्याफ्रुबेसी, टिमुरे, मैलुंग, थुलो हाकु और हाकुबेसी जैसे संवेदनशील इलाकों से 533 लोगों को सुरक्षित निकाला। गुरुवार देर शाम तक रसुवा में नेपाली सेना कुल 883 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा चुकी थी।
फिर बढ़ा भोटेकोशी नदी में बाढ़ का खतरा
नेपाल अभी पिछली बाढ़ की तबाही से पूरी तरह उबर भी नहीं पाया है कि भोटेकोशी नदी में दोबारा पानी बढ़ने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। तिब्बत की ओर बने एक बांध के टूटने की खबरों के बाद नेपाल में अलर्ट जारी किया गया है।
नेपाल पुलिस और नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के फ्लड फोरकास्टिंग डिविजन ने भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी के किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। रसुवा और नुवाकोट को हाई अलर्ट पर रखा गया है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
बिदुर और त्रिशूली बाजार के आसपास तैनात डोजर और अन्य बचाव उपकरणों को भी सुरक्षित स्थानों पर हटाया गया है। नेपाल-चीन सीमा और नदी किनारे कई स्थानों पर आवाजाही रोक दी गई है। रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, गोरखा, चितवन और नवलपरासी में बचाव दलों को भी अलर्ट पर रखा गया है।
पिछली बाढ़ में भारी तबाही
26 अगस्त को आई बाढ़ ने नेपाल के कई हिस्सों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। दिए गए विवरण के अनुसार, इस आपदा में 470 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। ग्लेशियर टूटने के बाद पानी, बर्फ और भारी मलबा ल्हेंडे खोला से भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में पहुंचा, जिससे सड़कें, पुल और कई हाइड्रोपावर परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं।
बाढ़ के कारण लगभग 431 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित होने की जानकारी है। इसके अलावा कई इलाकों में संपर्क और आवागमन भी बाधित हुआ है।
अब प्रशासन की नजर ऊपरी इलाकों में बने बैरियर लेक और अस्थिर जलाशयों पर है। अधिकारियों को आशंका है कि इनमें जमा पानी और मलबा आगे चलकर अचानक बाढ़ का कारण बन सकता है।
प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से नदी घाटियों, संवेदनशील सड़कों और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में जाने से बचने की अपील की है। राहत एवं बचाव टीमें लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं और जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी जारी है।