ईरानी युद्धपोत हमले पर सियासत तेज: विपक्ष ने मोदी सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल

Thu 05-Mar-2026,08:09 PM IST +05:30

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ईरानी युद्धपोत हमले पर सियासत तेज: विपक्ष ने मोदी सरकार की चुप्पी पर उठाए सवाल Iran Warship Attack
  • ईरानी युद्धपोत हमले पर विपक्ष ने सरकार को घेरा.

  • ईरान ने अमेरिका की कार्रवाई की आलोचना की.

  • भारत सरकार ने कुछ दावों को बताया भ्रामक.

Delhi / Delhi :

Delhi / हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत पर हुए हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है। इस घटना के बाद भारत की राजनीति में भी चर्चा बढ़ गई है और विपक्षी दलों ने मोदी सरकार से इस मामले पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है। बताया जा रहा है कि यह घटना चार मार्च को हुई, जब एक ईरानी युद्धपोत पर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हमला किया गया।

अमेरिका ने इस हमले की जानकारी तो दी, लेकिन उसने युद्धपोत का नाम सार्वजनिक नहीं किया। हालांकि बाद में श्रीलंका सरकार के बयान से यह सामने आया कि ईरानी युद्धपोत ‘डेना’ से एक आपातकालीन संदेश मिला था, जिसमें सहायता की मांग की गई थी। श्रीलंका की नौसेना के अनुसार हिंद महासागर में यह युद्धपोत डूब गया और जहाज पर सवार करीब 180 नौसैनिकों में से लगभग 140 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

ईरान ने इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराग़ची ने अमेरिका की कड़ी आलोचना करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि अमेरिका ने ईरान के तट से करीब दो हजार मील दूर समुद्र में एक अपराध किया है। उन्होंने कहा कि ‘फ्रिगेट डेना’ नाम का यह जहाज भारतीय नौसेना का मेहमान था और उस पर बिना किसी चेतावनी के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हमला किया गया। अराग़ची ने यह भी कहा कि अमेरिका को अपने इस कदम की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

गौरतलब है कि यह ईरानी युद्धपोत हाल ही में भारत में आयोजित इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू-2026 नामक सैन्य अभ्यास में शामिल हुआ था। इस अभ्यास की मेजबानी भारत ने की थी और इसमें कई देशों की नौसेनाओं ने भाग लिया था। इसी कारण इस घटना को लेकर भारत में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरानी नौसैनिक भारत के निमंत्रण पर कार्यक्रम में आए थे और वे भारत के मेहमान थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वे वापस लौट रहे थे, तब अमेरिकी पनडुब्बी ने उनके जहाज पर हमला कर दिया, लेकिन इस मामले में प्रधानमंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए सरकार की आलोचना की। उन्होंने लिखा कि भारत के बुलावे पर ईरान ने अपना युद्धपोत ‘मिलन युद्धाभ्यास 2026’ में भेजा था और उसमें सवार कई नौसैनिकों की मौत हो गई, लेकिन सरकार चुप है।

आरजेडी की प्रवक्ता प्रियंका भारती ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि जिस जहाज ने भारत के निमंत्रण पर नौसैनिक अभ्यास में भाग लिया, उस पर वापसी के दौरान हमला हुआ, फिर भी भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई।

हालांकि भारत सरकार ने इस मामले में सामने आई कुछ खबरों को भ्रामक बताया है। प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक टीम ने सोशल मीडिया पर कहा कि एक अमेरिकी चैनल में पूर्व अमेरिकी अधिकारी द्वारा यह दावा किया गया था कि अमेरिका ने ईरान पर हमले के लिए भारतीय नौसैनिक अड्डे का इस्तेमाल किया, लेकिन यह दावा पूरी तरह गलत है।

इसके बावजूद कई विशेषज्ञ और पूर्व राजनयिक भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं। पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कहा कि अगर भारत ने ईरानी जहाज को अभ्यास में शामिल होने के लिए आमंत्रित नहीं किया होता, तो वह वहां मौजूद नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि सैन्य अभ्यास के प्रोटोकॉल के अनुसार जहाज किसी तरह का गोला-बारूद नहीं ले जा सकते, इसलिए वह जहाज निहत्था था।

कंवल सिब्बल के मुताबिक भले ही भारत इस हमले के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं है, लेकिन एक मेजबान देश के रूप में उसकी नैतिक और मानवीय जिम्मेदारी जरूर बनती है। यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर भारत की कूटनीतिक स्थिति और प्रतिक्रिया पर अब व्यापक चर्चा हो रही है।