पीएम मोदी को इजरायल का सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’, भारत-इजरायल रिश्तों को समर्पित किया पुरस्कार

Thu 26-Feb-2026,12:16 PM IST +05:30

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पीएम मोदी को इजरायल का सर्वोच्च सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’, भारत-इजरायल रिश्तों को समर्पित किया पुरस्कार PM Modi Isreal Visit
  • पीएम मोदी को इजरायल का सर्वोच्च संसदीय सम्मान.

  • भारत-इजरायल रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को मजबूती.

  • साझा सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक जिम्मेदारी पर जोर.

Tel Aviv District / Tel Aviv :

Tel Aviv / इजरायल की आधिकारिक यात्रा के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वहां के सर्वोच्च संसदीय सम्मान ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल एक औपचारिक उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत और इजरायल के बीच वर्षों से विकसित होते भरोसे, साझेदारी और रणनीतिक सहयोग की सार्वजनिक स्वीकृति है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि न मानते हुए भारत-इजरायल की मित्रता को समर्पित किया, जो उनके संदेश को और अधिक सार्थक बनाता है।

सम्मान मिलने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि उन्हें नेसेट मेडल पाकर गर्व है और वे इसे विनम्रता व आभार के साथ स्वीकार करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सम्मान किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच गहरी दोस्ती और साझा मूल्यों की पहचान है। यह बयान इस बात को दर्शाता है कि भारत और इजरायल के रिश्ते केवल रणनीतिक या आर्थिक नहीं, बल्कि विचारों और विश्वासों के स्तर पर भी मजबूत हैं।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी इस सम्मान को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह भारत-इजरायल साझेदारी को आकार देने और उसे नई दिशा देने में प्रधानमंत्री मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका की स्वीकृति है। पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, तकनीक, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा और स्टार्टअप सहयोग जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। यह सम्मान उसी निरंतर बढ़ते सहयोग का परिणाम माना जा रहा है।

नेसेट को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल की संसद का आभार व्यक्त किया और बताया कि भारतीय संसद ने भी इजरायल के लिए एक पार्लियामेंट्री फॉरेन ग्रुप का गठन किया है। उन्होंने इजरायली सांसदों को भारत आने का आमंत्रण देते हुए संसदीय स्तर पर संवाद बढ़ाने की इच्छा जताई। यह पहल दर्शाती है कि दोनों देश केवल सरकार-से-सरकार संबंधों तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं के बीच भी मजबूत जुड़ाव बनाना चाहते हैं।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत पिछले कुछ वर्षों से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था रहा है और जल्द ही शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने व्यापार बढ़ाने, निवेश प्रवाह मजबूत करने और संयुक्त अवसंरचना विकास को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता दोहराई। इससे स्पष्ट है कि भारत और इजरायल भविष्य की अर्थव्यवस्था में साझेदार बनकर आगे बढ़ना चाहते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में सांस्कृतिक और दार्शनिक समानताओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इजरायल का ‘टिक्कुन ओलम’ और भारत का ‘वसुधैव कुटुंबकम’ दोनों ही विश्व को बेहतर बनाने की भावना पर आधारित हैं। ये विचार सीमाओं से परे जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों की बात करते हैं। इस तरह यह सम्मान केवल कूटनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि दो प्राचीन सभ्यताओं के बीच साझा दृष्टि और भविष्य की साझी उम्मीदों का प्रतीक भी बन गया है।