Japan Mars Mission | जापान का मंगल मिशन लॉन्च! फोबोस से धरती पर लाएगा नमूने, क्या खुलेगा बड़ा रहस्य?
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Japan Mars Mission
जापान ने H3 रॉकेट से MMX अंतरिक्ष मिशन लॉन्च किया।
फोबोस से कम से कम 10 ग्राम नमूने एकत्र करने का लक्ष्य।
मिशन की योजना के अनुसार, नमूने 2031 में पृथ्वी पर लौटाए जाएंगे।
Japan / अंतरिक्ष में एक ऐसा मिशन शुरू हुआ है, जो मंगल ग्रह के रहस्यों से पर्दा उठा सकता है! जापान का अंतरिक्ष यान मंगल के एक छोटे चंद्रमा से मिट्टी और चट्टानों के नमूने लेकर धरती पर लौटने की तैयारी में है। आखिर इन नमूनों में क्या छिपा है?
अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में जापान ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA ने मंगलवार को एक मानवरहित अंतरिक्ष यान मंगल ग्रह के चंद्रमा फोबोस की ओर रवाना किया। इस मिशन का उद्देश्य फोबोस की सतह से नमूने एकत्र करना और उन्हें विश्लेषण के लिए पृथ्वी पर वापस लाना है। सफल होने पर यह इस तरह का पहला मिशन होगा, जिसमें मंगल के किसी चंद्रमा से नमूने धरती पर लाए जाएंगे।
जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी के इस मिशन का नाम Martian Moons eXploration, यानी MMX है। अंतरिक्ष यान को दक्षिण-पश्चिमी जापान स्थित तनेगाशिमा स्पेस सेंटर से H3 रॉकेट के जरिए मंगलवार तड़के लॉन्च किया गया।
मिशन की योजना के अनुसार, अंतरिक्ष यान अगस्त 2027 में मंगल ग्रह तक पहुंचने की उम्मीद है, जबकि नमूनों के साथ इसकी पृथ्वी पर वापसी 2031 में निर्धारित है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इस अभियान से मंगल के दोनों चंद्रमाओं—फोबोस और डिमोस—की उत्पत्ति को समझने में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे हमारे सौरमंडल के शुरुआती इतिहास से जुड़े सवालों के जवाब भी मिल सकते हैं।
अब बात करते हैं फोबोस की। यह मंगल के दो चंद्रमाओं में बड़ा है, लेकिन आकार में पृथ्वी के चंद्रमा से बेहद छोटा है। इसकी लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई लगभग 27, 22 और 18 किलोमीटर है। यह मंगल की सतह से करीब 6,000 किलोमीटर ऊपर परिक्रमा करता है और एक दिन में लगभग तीन बार मंगल का चक्कर पूरा करता है।
JAXA का लक्ष्य फोबोस की सतह से कम से कम 10 ग्राम सामग्री एकत्र करना है। सुनने में यह मात्रा बहुत कम लग सकती है, लेकिन अंतरिक्ष विज्ञान में ऐसे नमूने बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। पृथ्वी की प्रयोगशालाओं में इनका अध्ययन करके वैज्ञानिक चंद्रमा की संरचना, निर्माण और संभावित उत्पत्ति के बारे में अधिक जानकारी जुटा सकेंगे।
इस मिशन की एक और खास बात जापान के H3 रॉकेट से जुड़ी है। यह H3 रॉकेट का पहला अंतरग्रहीय मिशन है। साल 2023 में अपनी पहली उड़ान के दौरान इसके दूसरे चरण का इंजन चालू नहीं हो पाया था। हालांकि, इसके बाद रॉकेट ने कई सफल प्रक्षेपण पूरे किए हैं।
अब पूरी दुनिया की नजर इस मिशन पर है। यदि जापान फोबोस से नमूने सफलतापूर्वक धरती पर लाने में कामयाब रहता है, तो यह मंगल के चंद्रमाओं को समझने की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी।