खेत बचाओ अभियान 2026: 22 अक्टूबर से शुरुआत, किसानों को मिलेंगी आधुनिक खेती और सरकारी योजनाओं की जानकारी

Sat 17-Oct-2026,07:21 PM IST +05:30

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खेत बचाओ अभियान 2026: 22 अक्टूबर से शुरुआत, किसानों को मिलेंगी आधुनिक खेती और सरकारी योजनाओं की जानकारी Khet Bachao Abhiyan 2026
  • ‘खेत बचाओ अभियान’ 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक आयोजित होगा।

  • प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा।

  • किसानों को फार्मर आईडी, किसान क्रेडिट कार्ड और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बारे में जागरूक किया जाएगा।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / किसानों की खेती को बेहतर बनाने, लागत घटाने और आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा अभियान शुरू करने जा रही है। 22 अक्टूबर से शुरू होने वाले इस अभियान में आखिर क्या-क्या बदलेगा और किसानों को कैसे फायदा मिलेगा? आइए जानते हैं।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आगामी ‘खेत बचाओ अभियान’ की तैयारियों को लेकर विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक की। यह अभियान 22 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक चलाया जाएगा। बैठक में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, बिहार, हरियाणा, असम, तेलंगाना, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर सहित कई राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

बैठक में अभियान के उद्देश्यों, गतिविधियों, कार्यान्वयन की रणनीति और किसानों की भागीदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने सभी राज्यों से अभियान को गंभीरता से लागू करने और इसकी जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल औपचारिकता बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए राज्य सरकारों, जिला प्रशासन, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

टिकाऊ खेती और आधुनिक तकनीकों पर जोर
अभियान के तहत किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों, संसाधनों के कुशल उपयोग और केंद्र सरकार की किसान-केंद्रित योजनाओं के बारे में जागरूक किया जाएगा।

इसके प्रमुख विषयों में फसल अवशेष प्रबंधन, एकीकृत कीट प्रबंधन, मिट्टी की सेहत में सुधार, जलवायु-अनुकूल खेती, प्राकृतिक खेती और कृषि यंत्रीकरण शामिल हैं। इसके अलावा दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने, जल संरक्षण, फसल विविधीकरण और अंतरफसली खेती पर भी ध्यान दिया जाएगा।

किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग, जैविक कृषि आदानों, पुनर्योजी कृषि पद्धतियों और धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों के बेहतर इस्तेमाल की जानकारी भी दी जाएगी। इसका उद्देश्य खेती को अधिक टिकाऊ बनाना और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।

सरकारी योजनाओं की जानकारी भी मिलेगी
‘खेत बचाओ अभियान’ के दौरान किसान पहचान पत्र यानी फार्मर आईडी बनाने, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड और बीज वितरण जैसी पहलों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड और कृषि यंत्रों से जुड़ी सुविधाओं के बारे में किसानों को जागरूक किया जाएगा, ताकि वे उपलब्ध सरकारी सहायता और आधुनिक तकनीकों का लाभ उठा सकें।

केंद्रीय मंत्री ने जिला कलेक्टरों को अभियान के प्रभावी आयोजन के लिए आवश्यक निर्देश देने का आग्रह किया। साथ ही राज्य और जिला स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति, निगरानी और समयबद्ध कार्यान्वयन पर जोर दिया।

लाखों किसानों तक पहुंचने की तैयारी
बैठक में प्रस्तुत योजना के अनुसार, कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन एजेंसी यानी ATMA और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR के लिए अलग-अलग 50-50 लाख प्रतिभागियों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा गया है।

कृषि विज्ञान केंद्रों और ATMA को मिलाकर 4,150 टीमों के गठन का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। इसके अलावा 12 हजार से अधिक वैज्ञानिकों, अधिकारियों और कार्यकर्ताओं के अभियान से जुड़ने की अपेक्षा है।

अभियान की अवधि में कुल 1.5 लाख बैठकों का लक्ष्य रखा गया है। इन बैठकों के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक जानकारी, व्यावहारिक प्रशिक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों का मार्गदर्शन दिया जाएगा। कृषि वैज्ञानिकों और विस्तार कार्यकर्ताओं की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण होगी।

राज्यों से सक्रिय भागीदारी की अपील
शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्यों से स्थानीय जरूरतों और सुविधाओं के अनुसार कार्यक्रमों की तारीखें तय करने को कहा। हालांकि, उन्होंने अभियान की प्रभावी शुरुआत और समय पर तैयारियां पूरी करने पर विशेष जोर दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि जो किसान सीधे कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो सकते, उन्हें प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया के माध्यम से जोड़ा जाना चाहिए।

अब देखना होगा कि यह अभियान जमीनी स्तर पर किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने में कितना प्रभावी साबित होता है।