AI Budget Surge | AI की दौड़ में कंपनियों पर ‘Software Tax’ का बोझ, 28% बजट खर्च!
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AI Software Tax Squeezes Company Budgets
कंपनियों के सॉफ्टवेयर बजट का औसतन 28% हिस्सा अनचाहे बदलावों पर खर्च।
95% कंपनियों ने ऐसे अपग्रेड के लिए भुगतान किया, जिनसे बेहतर परिणाम की उम्मीद नहीं थी।
91% कंपनियों ने वेंडर की शर्तों के कारण काम कर रहे हार्डवेयर को हटाया।
New Delhi / क्या बड़ी टेक कंपनियां बिना अपनी मर्जी के करोड़ों रुपये अतिरिक्त खर्च करने को मजबूर हैं? क्या सॉफ्टवेयर अपडेट और लाइसेंस बदलने का दबाव कारोबार के लिए नई मुसीबत बन रहा है? एक सर्वे में सामने आए आंकड़े आपको हैरान कर सकते हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को अपनाने की होड़ में दुनिया भर की कंपनियां अपने कारोबार को आधुनिक बनाने में जुटी हैं। लेकिन इसी बीच एक नई चुनौती सामने आई है। अमेरिका और ब्रिटेन की बड़ी कंपनियां अपने सॉफ्टवेयर बजट का औसतन 28 प्रतिशत हिस्सा ऐसे बदलावों पर खर्च कर रही हैं, जिन्हें वे अपनी मर्जी से चुनना नहीं चाहती थीं। इनमें सॉफ्टवेयर अपग्रेड, सिस्टम माइग्रेशन और लाइसेंस में बदलाव जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
सॉफ्टवेयर मेंटेनेंस कंपनी ओरिजिना की ओर से मंगलवार को जारी एक सर्वे में यह जानकारी सामने आई है। इस अध्ययन में 2,000 से अधिक कंपनियों को शामिल किया गया। रिपोर्ट में इन अनिवार्य खर्चों को ‘सॉफ्टवेयर टैक्स’ का नाम दिया गया है। इसका मतलब है कि कंपनियों को अपने कारोबार में इस्तेमाल हो रहे सॉफ्टवेयर को चालू रखने के लिए बार-बार अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है, भले ही वे उस बदलाव को जरूरी न मानती हों।
ओरिजिना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी थॉमस ओ'लेरी के मुताबिक, जब किसी कंपनी के सामने विकल्प यह हो कि वह अनचाहा अपग्रेड स्वीकार करे या फिर अपने महत्वपूर्ण सिस्टम के लिए मिलने वाला सपोर्ट खो दे, तो अपग्रेड स्वीकार करना अक्सर व्यावहारिक फैसला बन जाता है।
सर्वे के आंकड़े इस समस्या की गंभीरता दिखाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 95 प्रतिशत कंपनियों ने ऐसे वेंडर-निर्देशित अपग्रेड के लिए भुगतान किया, जिनसे उन्हें उम्मीद थी कि उनके नतीजे पहले से खराब हो सकते हैं। वहीं, 80 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि किसी बड़े सॉफ्टवेयर प्रदाता को छोड़ने से उनके कारोबार में गंभीर बाधाएं पैदा हो सकती हैं।
इतना ही नहीं, 84 प्रतिशत कंपनियों ने बताया कि उनके वरिष्ठ इंजीनियरिंग कर्मचारियों का समय अक्सर या हमेशा ऐसे सॉफ्टवेयर बदलावों में खर्च होता है, जबकि वे इसी समय का इस्तेमाल नए उत्पाद विकसित करने, तकनीकी नवाचार और कारोबार की जरूरतों को पूरा करने में कर सकते थे।
हार्डवेयर को लेकर भी स्थिति चिंताजनक बताई गई है। सर्वे में शामिल 91 प्रतिशत कंपनियों ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में उन्हें वेंडर की सपोर्ट डेडलाइन पूरी करने के लिए पूरी तरह काम कर रहे हार्डवेयर को भी हटाना पड़ा। इससे औसतन 1.65 साल की संभावित उपयोगी अवधि का नुकसान हुआ।
रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों में हालिया वेंडर-निर्देशित सॉफ्टवेयर बदलाव से जुड़ी औसत वार्षिक लागत 1.287 करोड़ डॉलर नहीं, बल्कि 12.87 मिलियन डॉलर यानी लगभग 1.287 करोड़ डॉलर बताई गई है। यह आंकड़ा सर्वे में शामिल संगठनों की रिपोर्ट की गई औसत लागत को दर्शाता है।
ओ'लेरी का कहना है कि यह समस्या केवल अमेरिका और ब्रिटेन तक सीमित नहीं है। पुराने तकनीकी सिस्टम पर निर्भर और लंबे समय से स्थापित कंपनियों को ऐसी चुनौतियों का अधिक सामना करना पड़ सकता है।
अब सवाल यह है कि AI के दौर में कंपनियां नवाचार पर अधिक खर्च करेंगी या पुराने सॉफ्टवेयर को बनाए रखने की बढ़ती लागत से जूझती रहेंगी? फिलहाल, यह सर्वे तकनीकी बदलावों के साथ आने वाले खर्च और कारोबारी जोखिमों पर नई बहस छेड़ता है।