RSS के 100 साल पूरे, नागपुर में विजयादशमी समारोह में मोहन भागवत ने स्वदेशी और राष्ट्रीय एकता पर दिया जोर

Tue 20-Oct-2026,10:25 AM IST +05:30

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RSS के 100 साल पूरे, नागपुर में विजयादशमी समारोह में मोहन भागवत ने स्वदेशी और राष्ट्रीय एकता पर दिया जोर RSS Nagpur Event
  • नागपुर में RSS का विजयादशमी समारोह, शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों का समापन।

  • मोहन भागवत ने राष्ट्रीय एकता, आत्मबोध और स्वदेशी पर दिया जोर।

  • संत रविदास, स्वामी श्रद्धानंद और स्वामी लक्ष्मणानंद के योगदान को किया याद।

Maharashtra / Nagpur :

Nagpur / राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 साल पूरे होने के अवसर पर नागपुर में विजयादशमी का भव्य आयोजन हुआ। मंच से मोहन भागवत ने भारत की पहचान, स्वदेशी और सामाजिक समरसता पर कई अहम बातें कहीं। आखिर उनके संबोधन में क्या रहा खास?

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS ने मंगलवार को महाराष्ट्र के नागपुर स्थित रेशिमबाग मैदान में अपना वार्षिक विजयादशमी समारोह आयोजित किया। यह आयोजन संघ के शताब्दी समारोहों के समापन वर्ष का हिस्सा रहा। कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजा की और संघ के संस्थापक केशव हेडगेवार को पुष्पांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, मुंबई में इजरायल के महावाणिज्यदूत यानिव रेवेच और दैनिक जागरण के प्रधान संपादक संजय गुप्ता सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। संजय गुप्ता को कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले और संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भी समारोह में शामिल हुए।

100 वर्षों की यात्रा और भारत की पहचान पर जोर
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने पिछले 100 वर्षों में आत्मबोध जगाने और भारत की एकता तथा पहचान को मजबूत करने के लिए काम किया है। उन्होंने बताया कि शताब्दी वर्ष के दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए और विजयादशमी का यह आयोजन उन कार्यक्रमों के समापन का अवसर है।

भागवत ने संत रविदास जी महाराज की 650वीं जयंती का उल्लेख करते हुए उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में संत रविदास ने आस्था, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक भक्ति का संदेश दिया। उनके जीवन और विचारों ने लोगों को अपने मूल्यों पर दृढ़ रहने और आत्मसम्मान बनाए रखने की प्रेरणा दी।

स्वामी श्रद्धानंद और स्वामी लक्ष्मणानंद को किया याद
RSS प्रमुख ने स्वामी श्रद्धानंद और स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के योगदान और बलिदान को भी याद किया। उन्होंने स्वामी श्रद्धानंद को आर्य समाज के प्रमुख संन्यासी, शिक्षाविद, शुद्धि आंदोलन के नेता और स्वतंत्रता सेनानी के रूप में उल्लेखित किया। वहीं, स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती के जनजातीय समुदायों की सेवा में दिए गए योगदान को भी याद किया।

भागवत ने कहा कि इन महापुरुषों के जीवन से समाज को अपने मूल्यों, आस्था और सेवा भावना के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा मिलती है।

पंच परिवर्तन और स्वदेशी पर भी चर्चा
अपने भाषण में मोहन भागवत ने संघ के ‘पंच परिवर्तन’ का उल्लेख किया। उन्होंने आत्मबोध और स्वदेशी को इसके महत्वपूर्ण पहलुओं में बताया। भारतीय संविधान की प्रस्तावना में लिखे ‘हम भारत के लोग’ शब्दों का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि आत्मबोध की भावना देश की सामूहिक पहचान से जुड़ी है।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना केशव हेडगेवार ने 1925 में नागपुर में विजयादशमी के दिन की थी। तभी से संघ हर वर्ष इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित करता रहा है।

इस वर्ष का आयोजन संघ की 100 वर्षों की यात्रा, सामाजिक समरसता, स्वदेशी और राष्ट्रीय पहचान से जुड़े विचारों पर केंद्रित रहा।