12th BRICS Parliamentary Forum | वैश्विक तनाव के बीच PM मोदी और ओम बिरला का क्या संदेश?

Mon 26-Oct-2026,02:18 PM IST +05:30

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12th BRICS Parliamentary Forum | वैश्विक तनाव के बीच PM मोदी और ओम बिरला का क्या संदेश? BRICS Parliamentary Forum: Global Tensions and Cooperation
  • ओम बिरला ने अंतरराष्ट्रीय तनाव कम करने में संसदों की भूमिका पर जोर दिया।

  • BRICS देशों की आवाज और आपसी सहयोग मजबूत करने पर चर्चा हुई।

  • युवाओं की भागीदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों और सतत विकास को महत्व दिया गया।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / दुनिया में बढ़ते युद्ध, आर्थिक अस्थिरता और व्यापारिक तनाव के बीच भारत में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठक आयोजित हुई। BRICS देशों के संसदीय प्रतिनिधि वैश्विक चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए जुटे हैं। आखिर इस मंच से दुनिया को क्या संदेश मिला?

नई दिल्ली में 12वें BRICS संसदीय मंच का आयोजन किया गया, जिसमें सदस्य देशों और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन परिसर में प्रतिनिधिमंडलों के साथ समूह तस्वीर खिंचवाई। प्रधानमंत्री ने मंच के उद्घाटन सत्र में भी हिस्सा लिया और आए हुए प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं से मुलाकात की।

वैश्विक चुनौतियों के समाधान में संसद की भूमिका
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि संसदें आपसी समझ और विश्वास मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय तनाव कम करने तथा वैश्विक चुनौतियों का शांतिपूर्ण समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

उन्होंने क्षेत्रीय संघर्षों, युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, व्यापारिक तनाव, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान ऐसे होने चाहिए, जिनसे आम नागरिकों के जीवन में सुधार आए और दुनिया अधिक समावेशी तथा शांतिपूर्ण बन सके।

ओम बिरला ने विश्वास जताया कि मंच पर होने वाली चर्चा आपसी सहयोग और विश्वास को नई दिशा देगी। उन्होंने कहा कि संसदीय साझेदारी के जरिए शांति, समृद्धि और सतत विकास के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि BRICS का उद्देश्य ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करना भी है। उन्होंने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में संयुक्त घोषणा-पत्र को सर्वसम्मति से अपनाए जाने को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

उन्होंने जोर दिया कि BRICS देशों की आकांक्षाएं केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उन्हें ठोस नीतियों और व्यावहारिक सहयोग में बदलना जरूरी है।

ओम बिरला ने युवाओं की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसदों की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं की आकांक्षाओं को समझें, उनकी आवाज को उचित स्थान दें और उनकी प्रतिभा को राष्ट्र निर्माण से जोड़ें।

लोकतांत्रिक मूल्यों और संप्रभुता का सम्मान
लोकसभा अध्यक्ष ने भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए कहा कि भारतीय लोकतंत्र की ताकत संवाद, विचारों की विविधता और आपसी सम्मान में निहित है। उन्होंने कहा कि संसदीय कूटनीति की असली ताकत दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करते हुए अंतरराष्ट्रीय संबंधों में लोकतांत्रिक दृष्टिकोण को शामिल करने में है।

हरिवंश ने बहुपक्षीय सहयोग को बताया महत्वपूर्ण
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत, विविध संस्कृतियों, भाषाओं और परंपराओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला BRICS वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श तथा सहयोग का एक प्रभावी मंच बनकर उभरा है।

हरिवंश ने आर्थिक अनिश्चितताओं, तकनीकी बदलाव, जलवायु परिवर्तन, सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट और सामाजिक असमानताओं जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए संसदों को सतर्क, उत्तरदायी और भविष्य के लिए तैयार रहने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने उम्मीद जताई कि इस मंच पर प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे, एक-दूसरे से सीखेंगे और लोगों के जीवन में सुधार लाने के लिए संसदीय उपायों पर विचार करेंगे।

दो दिवसीय आयोजन का उद्देश्य
इस संसदीय मंच में 11 BRICS सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के नेताओं का स्वागत किया गया। दो दिवसीय कार्यक्रम का समापन अगले दिन होना निर्धारित है।

कुल मिलाकर, 12वें BRICS संसदीय मंच का मुख्य संदेश वैश्विक शांति, आपसी विश्वास, लोकतांत्रिक संवाद और जन-केंद्रित विकास को बढ़ावा देना रहा। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि मंच पर हुई चर्चाएं भविष्य में ठोस नीतियों और सहयोग के रूप में किस तरह आगे बढ़ती हैं।