नेसेट में पीएम मोदी का ऐतिहासिक संबोधन: व्यापार, निवेश, एफटीए और स्टार्टअप सहयोग पर जोर
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Narendra Modi Israel Parliament Visit
भारत-इजरायल व्यापार और एफटीए पर जोर.
स्टार्टअप, एआई, सेमीकंडक्टर और क्वांटम तकनीक में सहयोग.
कृषि उत्कृष्टता केंद्रों और निवेश साझेदारी को बढ़ावा.
Tel Aviv / इजरायल की संसद नेसेट में अपने ऐतिहासिक संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और इजरायल के रिश्तों को नई ऊंचाई देने का स्पष्ट संदेश दिया। उनका भाषण केवल औपचारिक कूटनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें भविष्य की साझेदारी का एक ठोस रोडमैप भी झलक रहा था। उन्होंने दोस्ती का हाथ बढ़ाते हुए कहा कि भारत इजरायल के साथ व्यापार बढ़ाने, निवेश को मजबूत करने और संयुक्त बुनियादी ढांचा विकास को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले वर्ष हस्ताक्षरित द्विपक्षीय निवेश संधि ने दोनों देशों के कारोबारियों को भरोसा और स्थिरता प्रदान की है। उनका संकेत साफ था—जब निवेशकों को नीति और व्यवस्था पर विश्वास मिलता है, तभी दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी मजबूत होती है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने हाल के वर्षों में कई महत्वपूर्ण व्यापार समझौते किए हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में उसकी भूमिका और मजबूत हुई है।
उन्होंने कहा कि भारत ने अपने पश्चिम में यूरोपीय संघ और यूनाइटेड किंगडम के साथ, तथा पूर्व में यूएई और ओमान के साथ समझौते किए हैं। इजरायल के साथ द्विपक्षीय वस्तु व्यापार पिछले वर्षों में कई गुना बढ़ा है, लेकिन प्रधानमंत्री के अनुसार यह अभी भी संभावनाओं के पूरे दायरे को नहीं दर्शाता। इसी कारण दोनों देशों की टीमें एक महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर काम कर रही हैं। उनका मानना है कि यह समझौता व्यापार संबंधों में नई ऊर्जा भर सकता है और उद्योगों को नए अवसर प्रदान कर सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत और इजरायल केवल द्विपक्षीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि बहुपक्षीय मंचों पर भी साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं। उन्होंने आई2यू2 ढांचे—जिसमें भारत, इजरायल, यूएई और अमेरिका शामिल हैं—और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे जैसे प्रयासों का उल्लेख किया। इन मंचों के माध्यम से कनेक्टिविटी, व्यापार और रणनीतिक सहयोग को नई दिशा देने की योजना है।
इजरायल को अक्सर ‘स्टार्ट-अप नेशन’ कहा जाता है, और प्रधानमंत्री ने इस पहचान की सराहना करते हुए कहा कि भारत भी अपने युवाओं की नवाचार क्षमता को बढ़ावा देने में जुटा है। उन्होंने याद दिलाया कि 2018 में प्रधानमंत्री नेतन्याहू के साथ मिलकर उन्होंने भारत में आईक्रिएट टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर का उद्घाटन किया था। तब से इस पहल ने लगभग 900 स्टार्ट-अप्स को समर्थन दिया है। यह उदाहरण बताता है कि नवाचार के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी कितनी प्रभावी हो सकती है।
प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में भारत ने दुनिया का सबसे बड़ा और व्यापक एआई इम्पैक्ट समिट आयोजित किया, जिसमें 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने कहा कि भारत की महत्वाकांक्षा इजरायल की इनोवेशन व्यवस्था से मेल खाती है। क्वांटम तकनीक, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। साथ ही डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए सीमा पार वित्तीय जुड़ाव को भी मजबूत किया जा रहा है।
कृषि के क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री ने इजरायल की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि रेगिस्तानी परिस्थितियों में सटीक सिंचाई और जल प्रबंधन में इजरायल की विशेषज्ञता ने भारत की कृषि पद्धतियों को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दोनों देशों ने मिलकर भारत में 43 उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए हैं, जिन्होंने पांच लाख से अधिक किसानों को प्रशिक्षण दिया है। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि अब 100 केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए, ताकि लाखों किसानों और मछुआरों को लाभ मिल सके।
कुल मिलाकर, यह संबोधन केवल मित्रता का प्रतीक नहीं था, बल्कि भविष्य की साझा समृद्धि का स्पष्ट खाका भी था।