RSS London Visit: लंदन में मोहन भागवत के दौरे पर विरोध, RSS बोला- हम संवाद के लिए तैयार
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RSS London Visit
RSS ने मोहन भागवत के लंदन दौरे को लेकर विरोध के बीच संवाद के लिए तैयार होने की बात कही।
करीब 20 नागरिक संगठनों ने लंदन मेयर सादिक खान को पत्र लिखा।
सुनील आंबेकर ने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचारों का होना सामान्य है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे के दौरान कुछ संगठनों के विरोध के बीच संघ ने संवाद का रास्ता खुला रखने की बात कही है। RSS के मीडिया प्रभारी सुनील आंबेकर ने शुक्रवार को लंदन में कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचारों का सामने आना सामान्य बात है। संघ सभी पक्षों से बातचीत के लिए तैयार है और अपने विचारों को खुले तौर पर रखने में उसे कोई आपत्ति नहीं है।
मोहन भागवत 2 सितंबर से 7 सितंबर 2026 तक ब्रिटेन की यात्रा पर हैं। यह उनके तीन देशों के शताब्दी वर्ष संपर्क दौरे का अंतिम चरण है। अमेरिका के बाद ब्रिटेन पहुंचे भागवत के कार्यक्रमों को लेकर वहां कुछ नागरिक संगठनों ने विरोध दर्ज कराया है। इसी संदर्भ में जब सुनील आंबेकर से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि अलग-अलग आवाजें उठना लोकतांत्रिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा है।
आंबेकर ने कहा कि RSS शांति, एकता और समरसता की भावना के साथ ब्रिटेन आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ उन लोगों से बातचीत करने के लिए तैयार है, जो संवाद करना चाहते हैं। उनका कहना था कि RSS अपने बारे में, अपनी सोच और अपने विश्वदृष्टिकोण के बारे में खुलकर बात करना चाहता है।
उन्होंने कहा, “छिपाने के लिए कुछ नहीं है। हम यह बताने आए हैं कि हम क्या हैं, कैसे सोचते हैं और हमारी विश्वदृष्टि क्या है।” आंबेकर ने यह भी कहा कि संघ विचारों के आदान-प्रदान और बहस का स्वागत करता है। उनके मुताबिक, दूसरे पक्ष भी अपनी बात रखें और RSS भी अपनी बात रखे, यही लोकतांत्रिक संवाद का रास्ता है।
20 संगठनों ने लंदन मेयर को लिखा पत्र
भागवत के लंदन कार्यक्रम को लेकर करीब 20 नागरिक संगठनों ने लंदन के मेयर सादिक खान को पत्र लिखकर RSS से जुड़े कार्यक्रमों से दूरी बनाने की अपील की है। संगठनों ने प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर अपनी आपत्ति जताई और मेयर से इस पर रुख स्पष्ट करने का आग्रह किया।
पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले संगठनों में Hindus for Human Rights, UK-Indian Muslim Council, India Labour Solidarity और South Asia Solidarity Group समेत अन्य संगठन शामिल हैं। इन संगठनों ने RSS को लेकर गंभीर आरोप लगाए और भागवत के दौरे को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर कीं।
यह विरोध उस समय सामने आया है, जब अमेरिका में भी भागवत के कार्यक्रमों के दौरान प्रदर्शन हुए थे। हालांकि, RSS ने ब्रिटेन में उठ रही आपत्तियों के जवाब में टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाने की बात कही है।
न्यूयॉर्क में 5 हजार से ज्यादा लोगों को किया संबोधित
ब्रिटेन पहुंचने से पहले मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘Universal Oneness Celebration’ कार्यक्रम को संबोधित किया था। कार्यक्रम में 5,000 से अधिक लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। अपने संबोधन में भागवत ने एकता, विविधता और ‘धर्म’ की अवधारणा पर बात की।
उन्होंने कहा था कि धर्म को केवल धर्म या पूजा तक सीमित नहीं किया जा सकता, बल्कि यह एक व्यापक जीवन सिद्धांत है। उन्होंने भारत की पहचान में एकता और विविधता दोनों के साथ-साथ होने की बात कही।
अब लंदन में भागवत के कार्यक्रमों को लेकर विरोध और समर्थन के बीच RSS ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने विचारों को रखने के साथ-साथ असहमति रखने वालों से भी बातचीत के लिए तैयार है। संघ का कहना है कि लोकतंत्र में विचारों का अंतर स्वाभाविक है और इसका समाधान संवाद के जरिए ही होना चाहिए।