अमित शाह का बड़ा ऐलान, 2026-29 तक मिशन मोड में चलेगा नशे के खिलाफ अभियान

Sun 06-Sep-2026,07:49 PM IST +05:30

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अमित शाह का बड़ा ऐलान, 2026-29 तक मिशन मोड में चलेगा नशे के खिलाफ अभियान Amit Shah BIG Statement on Narcotics Control
  • अमित शाह ने 2026-29 के लिए नशे के खिलाफ तीन वर्षीय रोडमैप की घोषणा की।

  • ड्रग्स नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और डार्क नेट पर कार्रवाई तेज होगी।

  • नशामुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाकर युवाओं को अभियान से जोड़ने पर जोर दिया गया।

Goa / Panaji :

Panji / केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा है कि देश में नशीले पदार्थों की तस्करी और उसके नेटवर्क के खिलाफ लड़ाई को अब और अधिक व्यापक एवं तकनीक आधारित बनाया जाएगा। गोवा की राजधानी पणजी में नारकोटिक्स नियंत्रण पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में शाह ने कहा कि जुलाई 2026 से जुलाई 2029 तक तीन वर्षीय रोडमैप तैयार किया गया है। इस दौरान तय लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने और तिमाही समीक्षा के जरिए जवाबदेही सुनिश्चित करने का फैसला किया गया है।

गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत की मौजूदगी में शाह ने कहा कि नार्कोटिक्स सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए गंभीर खतरा है। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों से होने वाली कमाई का इस्तेमाल आतंकवाद के वित्तपोषण में भी किया जाता है। इसी कारण नार्को-टेरर का नेटवर्क राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।

शाह ने कहा कि 2019 के बाद केंद्र सरकार ने नशे के खिलाफ रणनीति में बड़ा बदलाव किया। पहले जहां छोटी मात्रा की जब्ती और छोटे आरोपियों की गिरफ्तारी तक कार्रवाई सीमित रहती थी, वहीं अब पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने पर जोर दिया जा रहा है। ड्रग्स की छोटी खेप मिलने पर उसके स्रोत और आगे की सप्लाई चेन की जांच की जाती है, जबकि सीमा पर बड़ी खेप पकड़े जाने पर यह पता लगाने की कोशिश होती है कि वह किन माध्यमों से देश के भीतर पहुंचने वाली थी।

गृह मंत्री के मुताबिक, 2019 में चार-स्तरीय एनकॉर्ड तंत्र तैयार किया गया। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एंटी-नार्कोटिक्स टास्क फोर्स के गठन के साथ केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया गया। नशे की लत से जूझ रहे लोगों के पुनर्वास के लिए 1933 मानस हेल्पलाइन शुरू की गई है। वहीं NIDAAN पोर्टल के जरिए नारकोटिक्स अपराधियों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया गया है।

सरकार ने डार्क नेट, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन, क्रिप्टो लेन-देन और डेड ड्रॉप डिलीवरी जैसे आधुनिक तरीकों से होने वाली तस्करी पर भी तकनीक आधारित कार्रवाई शुरू की है। वित्तीय जांच और PIT-NDPS पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

शाह ने बताया कि 2004 से 2014 के दौरान करीब 26 लाख किलोग्राम ड्रग्स जब्त किए गए थे, जिनकी कीमत लगभग 40 हजार करोड़ रुपये थी। वहीं 2014 से 2026 तक जब्ती बढ़कर 1 करोड़ 19 लाख किलोग्राम से अधिक हो गई, जिसका मूल्य करीब 1.89 लाख करोड़ रुपये बताया गया। इसी अवधि में नष्ट किए गए ड्रग्स की मात्रा भी 48 लाख 68 हजार किलोग्राम तक पहुंची।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सहयोग बढ़ाया गया है। शाह के अनुसार, 46 देशों के साथ समझौते किए गए हैं। 2019 से जुलाई 2026 तक 36 देशों से 274 भगोड़ों का प्रत्यर्पण भारत लाया गया। पिछले तीन वर्षों में 401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी हुए, जबकि 2026 में जुलाई तक 182 नोटिस की प्रक्रिया पूरी की गई।

नए रोडमैप के चार प्रमुख स्तंभ तय किए गए हैं—इंटेलिजेंस एवं ऑपरेशन आधारित एन्फोर्समेंट, प्रीकर्सर और सिंथेटिक ड्रग्स नियंत्रण, डिमांड एवं हार्म रिडक्शन तथा क्षमता निर्माण एवं समन्वय। इसके तहत हर व्यावसायिक मात्रा वाले मामले की वित्तीय जांच, ड्रग्स किंगपिन के डोजियर और तस्करी के बैकवर्ड-फॉरवर्ड लिंक की जांच पर जोर होगा।

शाह ने कहा कि एनसीसी, एनएसएस और My Bharat के जरिए लाखों ‘नशामुक्ति मित्र’ तैयार किए जाएंगे। नशामुक्ति केंद्रों की संख्या बढ़ाकर 1,751 करने और करीब 10 हजार स्वयंसेवकों को अभियान से जोड़ने की योजना है। उन्होंने कहा कि भारत में विदेशियों का स्वागत है, लेकिन ड्रग्स के साथ नहीं। सरकार Death Triangle और Death Crescent से होने वाली तस्करी पर चतुष्कोणीय रणनीति के तहत कार्रवाई कर रही है। उनका कहना था कि जिस संकल्प के साथ नक्सलवाद के खिलाफ अभियान चलाया गया, उसी संकल्प के साथ देश से ड्रग्स की समस्या को भी खत्म करने का प्रयास किया जाएगा।