सचिन पायलट बने पंजाब कांग्रेस प्रभारी, गुटबाजी खत्म कर संगठन को एकजुट करना बड़ी चुनौती
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Sachin Pilot Punjab
सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है।
पंजाब में गुटबाजी खत्म कर वरिष्ठ नेताओं को एकजुट करना पायलट की बड़ी चुनौती होगी।
राहुल गांधी की प्रस्तावित बस यात्रा के बीच पायलट की पहली बड़ी परीक्षा होगी।
कांग्रेस संगठन में हुए बड़े फेरबदल के बाद सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का नया प्रभारी बनाया गया है। पार्टी ने भूपेश बघेल की जगह पायलट को यह जिम्मेदारी सौंपी है। चुनाव से पहले गुटबाजी और आपसी खींचतान से जूझ रही पंजाब कांग्रेस में एकजुटता कायम करना अब सचिन पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, यह जिम्मेदारी पार्टी में उनके बढ़ते राजनीतिक कद का संकेत भी मानी जा रही है।
सचिन पायलट का राजनीतिक सफर कांग्रेस में काफी महत्वपूर्ण रहा है। वह मनमोहन सिंह सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। दिसंबर 2023 में उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया और छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी दी गई थी।
पायलट को लेकर यह चर्चा भी चल रही थी कि 2028 के अंत में होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव को देखते हुए उन्हें दोबारा राज्य में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। लेकिन अब पंजाब का प्रभार मिलने के बाद राजस्थान वापसी का इंतजार और बढ़ गया है। इसके साथ ही पंजाब की नई जिम्मेदारी से पार्टी में पायलट का कद भी बढ़ा है।
पंजाब में गुटबाजी सबसे बड़ी चुनौती
पंजाब कांग्रेस लंबे समय से अंदरूनी खींचतान से परेशान है। पार्टी के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की अगुआई में कई वरिष्ठ नेता प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को पद से हटाने की मांग कर रहे हैं। लंबे विचार-विमर्श के बाद कांग्रेस आलाकमान ने एक जुलाई को फैसला किया कि राजा वडिंग पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे।
वहीं, चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमिटी की जिम्मेदारी दी गई। लेकिन इस फैसले से चन्नी पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुए। विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा, सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा और चुनाव प्रबंधन समिति के प्रमुख बनाए गए विजय इन्द्र सिंगला भी पार्टी के भीतर चल रही खींचतान का हिस्सा रहे हैं।
ऐसे में सचिन पायलट के सामने सबसे पहली चुनौती सभी बड़े नेताओं को एक मंच पर लाने की होगी। उन्हें संगठन के अलग-अलग गुटों के बीच भरोसा कायम करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि चुनाव से पहले पार्टी का पूरा फोकस राजनीतिक लड़ाई पर रहे।
भूपेश बघेल की कोशिशें नहीं कर पाईं कलह खत्म
भूपेश बघेल को फरवरी 2025 में पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया था। उन्होंने पार्टी के भीतर चल रहे विवाद को खत्म करने और नेताओं के बीच समन्वय बनाने की कोशिश की। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद पंजाब कांग्रेस की गुटबाजी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी।
बघेल राजा वडिंग को पद पर बनाए रखने के पक्ष में थे और चुनाव से पहले प्रदेश नेतृत्व में बदलाव के खिलाफ थे। इसी वजह से राजा विरोधी गुट उनके खिलाफ भी मुखर रहा। माना गया कि बघेल पंजाब कांग्रेस के विवाद में पूरी तरह तटस्थ भूमिका कायम नहीं रख पाए और न ही गुटों के बीच विवाद का स्थायी समाधान निकाल सके।
अब पायलट को प्रभारी बनाए जाने के बाद पंजाब कांग्रेस के लगभग सभी प्रमुख नेताओं की ओर से इसका स्वागत किया गया है। राजा वडिंग, चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा समेत कई नेताओं ने इस नियुक्ति का समर्थन किया है। लेकिन असली परीक्षा आगे होगी। सवाल यही है कि क्या प्रभारी बदलने के बाद चन्नी और उनके समर्थक प्रदेश अध्यक्ष को बदलने की मांग छोड़ देंगे?
राहुल गांधी की बस यात्रा होगी पहली बड़ी परीक्षा
पंजाब में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच सीधा राजनीतिक मुकाबला है। राज्य में भगवंत मान सरकार के सामने कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। वहीं, बीजेपी और अकाली दल के संभावित गठबंधन की स्थिति में चुनावी मुकाबला और त्रिकोणीय हो सकता है।
इसी राजनीतिक माहौल में राहुल गांधी जल्द ही पंजाब में पार्टी के नेताओं के साथ बस यात्रा निकालने वाले हैं। सचिन पायलट के लिए यह दौरा पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। उन्हें यह दिखाना होगा कि पार्टी के तमाम गुट एक साथ चुनावी मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं।
सचिन पायलट की लोकप्रियता कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ-साथ युवाओं के बीच भी बताई जाती है। अब पंजाब में उनकी संगठनात्मक क्षमता की परीक्षा होगी। अगर वह गुटबाजी पर नियंत्रण पाने और कांग्रेस को मजबूत करने में सफल रहते हैं, तो इसका असर न सिर्फ पंजाब की राजनीति पर पड़ेगा, बल्कि कांग्रेस में उनके भविष्य की भूमिका और राजस्थान वापसी की संभावनाओं पर भी पड़ सकता है।