RSS Centenary: मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे का 100 से अधिक हिंदू संगठनों ने किया स्वागत, ‘पांच परिवर्तन’ की सराहना

Fri 04-Sep-2026,12:07 PM IST +05:30

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RSS Centenary: मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे का 100 से अधिक हिंदू संगठनों ने किया स्वागत, ‘पांच परिवर्तन’ की सराहना RSS Centenary
  • मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे का 100 से अधिक हिंदू संगठनों ने स्वागत किया।

  • ब्रिटेन के संगठनों ने आरएसएस के ‘पांच परिवर्तन’ का समर्थन किया।

  • ब्रिटिश संसद में भागवत के वीजा को लेकर सवाल उठे, कुछ संगठनों ने विरोध किया।

Delhi / Delhi :

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के ब्रिटेन दौरे का वहां सक्रिय 100 से अधिक हिंदू संगठनों ने स्वागत किया है। आरएसएस के शताब्दी वर्ष के अवसर पर चलाए जा रहे अंतरराष्ट्रीय संपर्क अभियान के तहत डॉ. भागवत तीन देशों की यात्रा पर हैं। अमेरिका और कनाडा के बाद अब उनके दौरे का अंतिम चरण ब्रिटेन में शुरू हुआ है। उनके ब्रिटेन पहुंचने के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर उनके दौरे का स्वागत किया।

इन संगठनों में हिंदू काउंसिल यूके, हिंदू फोरम ऑफ ब्रिटेन, हिंदू स्वयंसेवक संघ यूके और इनसाइट यूके सहित कई संगठन शामिल हैं। संयुक्त बयान में आरएसएस को दुनिया के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में से एक बताया गया। संगठनों ने कहा कि आरएसएस सामाजिक एकता, नेतृत्व विकास, स्वयंसेवा, व्यक्तित्व निर्माण और वैश्विक बंधुभाव को बढ़ावा देने के लिए काम करता है।

आरएसएस के ‘पांच परिवर्तन’ की सराहना
ब्रिटेन के हिंदू संगठनों ने डॉ. मोहन भागवत के नेतृत्व में आरएसएस की ओर से सामने रखे गए ‘पांच परिवर्तन’ के विचारों का भी समर्थन किया। इनमें सामाजिक समरसता और एकता, परिवार के महत्व को मजबूत करना, निःस्वार्थ सेवा, पर्यावरण संरक्षण तथा नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन जैसे विषय शामिल हैं।

संगठनों का कहना है कि ये मुद्दे सामाजिक जिम्मेदारी, सामुदायिक सहभागिता और बेहतर समाज के निर्माण से जुड़े हैं। भागवत के दौरे को ब्रिटेन में हिंदू समुदाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों के बीच संवाद के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।

ब्रिटिश संसद में वीजा को लेकर सवाल
हालांकि, डॉ. भागवत के ब्रिटेन दौरे को लेकर ब्रिटिश संसद में उनके वीजा और प्रवेश से जुड़े सवाल भी उठाए गए। ब्रिटिश-भारतीय मंत्री नादिया व्हिटोम ने ब्रिटेन के गृह मंत्रालय से पूछा कि क्या डॉ. भागवत के दौरे का सरकार ने पूरी तरह परीक्षण किया है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या दौरे का मूल्यांकन सरकार की उस नीति के तहत किया गया, जिसके अनुसार हिंसा, घृणा या कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा देने वाले लोगों के प्रवेश को लेकर जांच की जाती है।

इस पर ब्रिटेन के सुरक्षा मंत्री डैन जार्विस ने संसद में जवाब देते हुए कहा कि सरकार व्यक्तिगत मामलों पर टिप्पणी नहीं कर सकती। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार हिंसा और नफरत को बढ़ावा देने वाले विचारों के प्रसार सहित विभिन्न प्रकार के संभावित खतरों को गंभीरता से लेती है। उन्होंने यह भी कहा कि ब्रिटेन में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए देश के इमिग्रेशन नियमों में निर्धारित आवश्यक शर्तों को पूरा करना अनिवार्य है।

दौरे का कुछ संगठनों ने किया विरोध
भागवत के ब्रिटेन दौरे को लेकर सभी संगठनों का रुख एक जैसा नहीं है। दक्षिण एशिया एकता समूह और हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स यूके सहित कुछ नागरिक संगठनों के नेतृत्व में ब्रिटिश सरकार से आरएसएस प्रमुख के दौरे का बहिष्कार करने की मांग भी की गई है।

इस तरह डॉ. मोहन भागवत का ब्रिटेन दौरा जहां बड़ी संख्या में हिंदू संगठनों के समर्थन और स्वागत के कारण चर्चा में है, वहीं उनके वीजा और आरएसएस से जुड़े मुद्दों को लेकर राजनीतिक तथा नागरिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं।