केंद्रीय बजट 2026-27 में आयुष को बढ़ावा
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बजट 2026-27 में आयुष शिक्षा, अनुसंधान और गुणवत्ता सुधार से पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्वास्थ्य नेतृत्व की दिशा में नई मजबूती मिली।
तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान उच्च शिक्षा, अनुसंधान और साक्ष्य-आधारित एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं को देशभर में विस्तार देंगे।
Delhi/ बजट 2026-27 में आयुष शिक्षा, अनुसंधान, गुणवत्ता आश्वासन, चिकित्सा पर्यटन और कुशल मानव संसाधन के विकास के लिए कई अहम पहलें घोषित की गई हैं। इनका उद्देश्य पारंपरिक चिकित्सा को निवारक स्वास्थ्य सेवा, आर्थिक विकास और वैश्विक नेतृत्व के प्रमुख साधन के रूप में स्थापित करना है।
सबसे बड़ी घोषणा के तहत तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थानों की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया है। इन संस्थानों से स्नातक व परास्नातक स्तर की उच्च गुणवत्ता शिक्षा, उन्नत अनुसंधान और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा मिलेगा। इससे देशभर में शैक्षणिक मानकों को नई ऊंचाई मिलने और साक्ष्य-आधारित एकीकृत स्वास्थ्य सेवा को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इसके साथ ही आयुष फार्मेसियों और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं को अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन मानकों के अनुरूप उन्नत करने की योजना बनाई गई है। इससे उत्पाद गुणवत्ता, उपभोक्ता विश्वास और निर्यात क्षमता में वृद्धि होगी। औषधीय पौधे उगाने वाले किसानों और आयुष से जुड़े सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यमों को भी सीधा लाभ मिलेगा।
भारत के वैश्विक नेतृत्व को सुदृढ़ करते हुए जामनगर स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन के वैश्विक पारंपरिक औषधि केंद्र को और विकसित किया जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान सहयोग, प्रशिक्षण और नीतिगत संवाद को बढ़ावा मिलेगा और भारत पारंपरिक चिकित्सा के वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित होगा।
बजट में पांच क्षेत्रीय उन्नत चिकित्सा पर्यटन आयुष केंद्रों की स्थापना का भी प्रस्ताव है। ये केंद्र आधुनिक चिकित्सा, आयुष पद्धतियों और पुनर्वास सेवाओं को एकीकृत करेंगे। इससे आयुष चिकित्सकों, योग प्रशिक्षकों, थेरेपिस्ट और संबंधित पेशेवरों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचे के तहत केयरगिवर प्रशिक्षण कार्यक्रम में योग और स्वास्थ्य देखभाल को शामिल किया जाएगा, जिससे अगले वर्ष करीब डेढ़ लाख प्रशिक्षित केयरगिवर तैयार होंगे। इससे वृद्धावस्था और अग्रिम स्वास्थ्य सेवाएं सशक्त होंगी।
श्री जाधव ने कहा कि यह बजट पारंपरिक चिकित्सा को पूरक नहीं, बल्कि भारत के स्वास्थ्य भविष्य का अभिन्न हिस्सा मानने की सोच को दर्शाता है और भारत को साक्ष्य-आधारित समग्र स्वास्थ्य सेवा का वैश्विक केंद्र बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है।