बजट सत्र में लोकसभा ठप

Fri 06-Feb-2026,01:47 PM IST +05:30

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बजट सत्र में लोकसभा ठप Budget-Session-Lok-Sabha-Opposition-Protest-Adjourned
  • बजट सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष का हंगामा, प्रश्नकाल और बजट चर्चा पूरी तरह बाधित।

  • लोकसभा में गतिरोध के बीच राज्यसभा की कार्यवाही शांतिपूर्ण तरीके से जारी रही।

Delhi / Delhi :

Delhi/ संसद के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को लोकसभा की कार्यवाही एक बार फिर राजनीतिक हंगामे की भेंट चढ़ गई। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सांसद पोस्टर और प्लेकार्ड लेकर वेल में पहुंच गए और जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। लगातार शोर-शराबे के चलते सदन की कार्यवाही बाधित रही, जिस पर लोकसभा अध्यक्ष को कड़ी टिप्पणी करनी पड़ी। हालात नहीं सुधरने पर सदन को कई बार स्थगित करना पड़ा, जिससे बजट से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी।

लोकसभा में हंगामे का पूरा घटनाक्रम:
शुक्रवार सुबह प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सांसद संगठित रूप से पोस्टर और प्लेकार्ड के साथ वेल में आ गए। वे सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे, जिससे प्रश्नकाल सुचारू रूप से नहीं चल सका। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हंगामे पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि कुछ सदस्य योजनाबद्ध तरीके से सदन की कार्यवाही बाधित कर रहे हैं और संसद की गरिमा बनाए रखने को तैयार नहीं हैं।

स्पीकर ने सदस्यों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यह व्यवहार जारी रहा तो सदन चलाना संभव नहीं होगा। इसके बावजूद हंगामा थमने का नाम नहीं लिया, जिसके बाद लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

दोबारा कार्यवाही शुरू, फिर वही हालात:
दोपहर 12 बजे कार्यवाही पुनः शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने एक बार फिर वेल में पहुंचकर नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान वे हाथों में ‘जय संविधान’ लिखे प्लेकार्ड लहराते नजर आए। पीठासीन अधिकारी कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने सदस्यों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन चलने देने की अपील की।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सदन के भीतर प्लेकार्ड लहराना संसदीय नियमों के खिलाफ है और ऐसे माहौल में बजट पर सार्थक चर्चा संभव नहीं है। लगातार शोर-शराबे के चलते अंततः लोकसभा की कार्यवाही 9 फरवरी सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

राज्यसभा में स्थिति रही अलग:
जहां लोकसभा में पूरे दिन हंगामा देखने को मिला, वहीं राज्यसभा की कार्यवाही अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रही। उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान सदस्यों ने जनहित से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए और कार्यवाही सामान्य ढंग से आगे बढ़ती रही।