बिहार MLC चुनाव में JDU को बड़ा झटका! तीन सीटों पर हार के बाद क्यों बुलाई समीक्षा बैठक?
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Bihar MLC Election 2026
जेडीयू के चार उम्मीदवारों में से केवल नीरज कुमार चुनाव जीत सके।
सारण शिक्षक, तिरहुत स्नातक और दरभंगा शिक्षक सीट पर पार्टी को हार मिली।
संजय झा और उमेश कुशवाहा की अध्यक्षता में चुनावी प्रदर्शन की समीक्षा की गई।
Patna / एक सीट पर जीत, लेकिन तीन सीटों पर करारी हार! बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने जेडीयू के सामने संगठन और गठबंधन की चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। आखिर कहां चूक हुई और क्या पार्टी के भीतर भी सब कुछ ठीक नहीं है?
बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद जनता दल यूनाइटेड यानी जेडीयू ने अपनी चुनावी रणनीति और संगठनात्मक प्रदर्शन की समीक्षा शुरू कर दी है। पार्टी ने जिन चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, उनमें से केवल पटना स्नातक सीट पर जीत हासिल हुई। बाकी तीन सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। इस प्रदर्शन के बाद पार्टी नेतृत्व ने 5 नवंबर को पटना स्थित प्रदेश कार्यालय में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुलाई।
यह बैठक दोपहर दो बजे कर्पूरी सभागार में आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा कर रहे हैं। बैठक में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, संबंधित जिलों के अध्यक्षों और पदाधिकारियों को शामिल किया गया। जिला अध्यक्षों से स्थानीय स्तर पर संगठन की स्थिति और चुनावी प्रदर्शन से जुड़ी रिपोर्ट भी मांगी गई।
अब सवाल है कि आखिर जेडीयू के लिए ये नतीजे चिंता का विषय क्यों बन गए हैं?
दरअसल, पार्टी के लिए सारण शिक्षक और तिरहुत स्नातक सीटों पर मिली हार विशेष रूप से चर्चा का विषय है। इसके अलावा दरभंगा शिक्षक सीट पर भी जेडीयू उम्मीदवार को सफलता नहीं मिली। वहीं, पटना स्नातक सीट पर पार्टी के वरिष्ठ नेता नीरज कुमार अपनी जीत बरकरार रखने में कामयाब रहे।
समीक्षा बैठक में उन कारणों पर चर्चा की जा रही है, जिनकी वजह से पार्टी को तीन सीटों पर हार मिली। इनमें संगठन की कमजोरी, चुनाव प्रचार में कमी, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और उम्मीदवारों को स्थानीय स्तर पर मिले समर्थन जैसे मुद्दे शामिल हैं। जिला अध्यक्षों की रिपोर्ट के माध्यम से यह समझने की कोशिश होगी कि किन क्षेत्रों में पार्टी का संगठन अपेक्षा के अनुसार काम नहीं कर पाया।
इस चुनाव में गठबंधन के भीतर तालमेल का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बनकर सामने आया है। चुनाव प्रचार के दौरान कुछ जेडीयू उम्मीदवारों ने सहयोगी दलों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के सवाल उठाए थे। मीडिया रिपोर्टों में भी भाजपा और जेडीयू के बीच चुनावी समन्वय को लेकर असंतोष की चर्चा हुई है। ऐसे में समीक्षा बैठक में यह आकलन भी हो सकता है कि सहयोगी दलों के साथ तालमेल की कमी का नतीजों पर कितना असर पड़ा।
वहीं, पटना स्नातक सीट का चुनाव भी कई घटनाक्रमों के कारण चर्चा में रहा। मोकामा के विधायक अनंत सिंह ने जेडीयू उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर प्रचार किया और जन सुराज के उम्मीदवार अनुज सिंह का समर्थन किया था। इस घटनाक्रम के बाद 24 अक्टूबर को जेडीयू ने अनंत सिंह और उनकी पत्नी नीलम देवी को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधि माना था।
इसलिए नीरज कुमार की जीत के बावजूद पटना सीट से जुड़े अंदरूनी विरोध और चुनावी घटनाक्रम पर भी चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
जेडीयू के सामने अब चुनौती केवल तीन सीटों पर मिली हार की वजह तलाशने की नहीं है, बल्कि संगठन को मजबूत बनाने, कार्यकर्ताओं में समन्वय बढ़ाने और आगामी चुनावों के लिए रणनीति सुधारने की भी है। अब देखना होगा कि इस समीक्षा के बाद पार्टी क्या कदम उठाती है।