Space Tech Startups India: भारत में 440 स्पेस टेक स्टार्टअप, निजी कंपनियों के 6+ रॉकेट लॉन्च की तैयारी
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Space Tech Startups India
भारत में करीब 440 स्पेस टेक स्टार्टअप पंजीकृत।
IN-SPACe ने 52 संस्थाओं को 113 प्राधिकरण दिए।
अगले वर्षों में निजी रॉकेट लॉन्च बढ़ने की संभावना।
New Delhi / भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से निजी भागीदारी और स्टार्टअप इनोवेशन की ओर बढ़ रहा है। देश में स्पेस टेक्नोलॉजी से जुड़े करीब 440 स्टार्टअप पंजीकृत हैं। वहीं, भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी के बीच आने वाले वर्षों में वाणिज्यिक रॉकेट लॉन्च की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी का अनुमान है। यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में दी।
440 स्पेस टेक स्टार्टअप पंजीकृत
डीपीआईआईटी स्टार्ट-अप इंडिया पोर्टल के अनुसार भारत में लगभग 440 अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी स्टार्टअप पंजीकृत हैं। यह आंकड़ा देश में तेजी से विकसित हो रहे निजी अंतरिक्ष इकोसिस्टम की तस्वीर पेश करता है। इन स्टार्टअप्स के जरिए रॉकेट, उपग्रह, अंतरिक्ष संचार, पृथ्वी अवलोकन और अन्य अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ रही है।
भारतीय अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी कंपनियों की भागीदारी को बढ़ावा देने में IN-SPACe की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। जानकारी के अनुसार, IN-SPACe ने 52 गैर-सरकारी संस्थाओं (NGEs) को विभिन्न अंतरिक्ष गतिविधियों के संचालन के लिए 113 प्राधिकरण प्रदान किए हैं। इनमें 18 स्टार्टअप शामिल हैं।
इन स्टार्टअप्स को मिली मंजूरी
प्राधिकरण प्राप्त करने वाले स्टार्टअप्स में अग्निकुल कॉसमॉस, अक्षत एयरोस्पेस, अज़ीस्ता BST, बेलैट्रिक्स एयरोस्पेस, कॉस्मोसर्व स्पेस इंडिया, ध्रुवा स्पेस, दिगांतारा रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज, गैलेक्सीआई स्पेस सॉल्यूशंस, हैक्स20लैब्स इंडिया, इनऑर्बिट स्पेस टेलीकम्युनिकेशंस, मनस्तु स्पेस टेक्नोलॉजीज, एनस्पेस टेक इंडिया, ऑर्बिटएड एयरोस्पेस, पियरसाइट स्पेस, पिक्सलस्पेस इंडिया, स्काईरूट एयरोस्पेस, स्पेस किड्ज़ इंडिया और टेकमी2स्पेस टेक्नोलॉजीज शामिल हैं।
इन कंपनियों को विभिन्न अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए मिले प्राधिकरण निजी क्षेत्र की बढ़ती क्षमताओं और भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में नए कारोबारी अवसरों को दर्शाते हैं।
ISRO के बुनियादी ढांचे तक निजी कंपनियों की पहुंच
भारतीय निजी कंपनियों को अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए ISRO के बुनियादी ढांचे के इस्तेमाल का अवसर भी दिया जा रहा है। इसमें श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के प्रक्षेपण पैड भी शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक, ISRO के बुनियादी ढांचे के उपयोग और पहुंच के लिए आवेदन IN-SPACe के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्राप्त किए जाते हैं। इन आवेदनों को निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP के अनुसार संसाधित किया जाता है। इसके बाद लॉन्च से जुड़ी तैयारियों और अन्य तकनीकी पहलुओं की समीक्षा IN-SPACe की विशेषज्ञ समिति द्वारा की जाती है।
अगले दो वर्षों में निजी रॉकेट लॉन्च की तैयारी
भारत में निजी कंपनियों द्वारा वाणिज्यिक रॉकेट लॉन्च को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में भारतीय निजी कंपनियों द्वारा दो वाणिज्यिक रॉकेट लॉन्च किए जाने की योजना बताई गई है।
वहीं, वित्त वर्ष 2027-28 के लिए लॉन्च की सूची को अभी IN-SPACe द्वारा मंजूरी दिया जाना बाकी है। हालांकि, अनुमान है कि इस अवधि में भारतीय निजी कंपनियों की ओर से छह से अधिक वाणिज्यिक रॉकेट लॉन्च किए जा सकते हैं।
निजी क्षेत्र के लिए खुल रहा अंतरिक्ष बाजार
भारत सरकार की नीतियों और IN-SPACe के माध्यम से निजी कंपनियों को अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रवेश और बुनियादी ढांचे के उपयोग के अवसर मिल रहे हैं। 440 के करीब स्पेस टेक स्टार्टअप का पंजीकरण और दर्जनों गैर-सरकारी संस्थाओं को मिले प्राधिकरण इस बदलाव की गति को दिखाते हैं।
आने वाले वर्षों में निजी रॉकेट लॉन्च की संख्या बढ़ने से भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा, तकनीकी नवाचार और व्यावसायिक गतिविधियों को और गति मिलने की संभावना है। इससे देश में अंतरिक्ष आधारित सेवाओं और तकनीकों के विकास के साथ नए स्टार्टअप और रोजगार अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
सरकार की ओर से राज्यसभा में दी गई जानकारी से स्पष्ट है कि भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र अब केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं रह गया है। निजी कंपनियां और स्टार्टअप भी इस क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमता और कारोबारी संभावनाओं के साथ तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले वर्षों में वाणिज्यिक लॉन्च की बढ़ती संख्या भारत को वैश्विक निजी अंतरिक्ष बाजार में और मजबूत स्थिति दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।