भारतीय सांख्यिकी सेवा 2026 बैच से मिले उपराष्ट्रपति, बोले- सही आंकड़ों से ही सही निर्णय
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उपराष्ट्रपति ने कहा कि सही आंकड़ों के बिना सही निर्णय संभव नहीं है।
34 प्रशिक्षु अधिकारियों में 16 महिला अधिकारी शामिल हैं।
युवा अधिकारियों से ईमानदारी, निष्पक्षता और डेटा आधारित निर्णयों पर जोर देने की अपील।
New Delhi / भारतीय सांख्यिकी सेवा के 2026 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों ने आज उपराष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात की। इस दौरान उपराष्ट्रपति ने 34 युवा अधिकारियों से संवाद किया, जिनमें 16 महिला अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रतिष्ठित भारतीय सांख्यिकी सेवा में शामिल होने पर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
उपराष्ट्रपति ने भारतीय प्रशासन और नीति निर्माण में सटीक, विश्वसनीय और समयबद्ध आंकड़ों की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यदि आंकड़े सही नहीं होंगे तो उनसे जुड़े निर्णय भी सही नहीं हो सकते। प्रभावी योजना बनाने, संसाधनों का उचित आवंटन करने और सरकारी योजनाओं को सही लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए विश्वसनीय आंकड़े आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि आंकड़े केवल संख्याओं का संग्रह नहीं हैं, बल्कि शासन के महत्वपूर्ण साधन हैं। इनके माध्यम से सरकार देश, समाज और विभिन्न वर्गों की वास्तविक स्थिति को समझ सकती है। किसी भी सरकारी योजना की सफलता काफी हद तक आंकड़ों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। ऐसे में आंकड़ों का सही तरीके से संग्रह, रखरखाव और समय पर प्रस्तुतीकरण बेहद जरूरी है।
महिला भागीदारी को बताया सशक्तीकरण का संकेत
श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने भारतीय सांख्यिकी सेवा में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना की। 34 प्रशिक्षु अधिकारियों में 16 महिला अधिकारी हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं का बढ़ता प्रतिनिधित्व भारत के महिला सशक्तीकरण से महिला-नेतृत्व वाले विकास की ओर बढ़ने का संकेत है।
उपराष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि सरकारी कार्यक्रमों के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए केवल आंकड़े पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि क्षेत्रीय अनुभव और जमीनी परिस्थितियों को भी समझना आवश्यक है। उन्होंने सांख्यिकीविदों को पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताया।
डिजिटल डेटाबेस और आधुनिक आंकड़ा व्यवस्था पर जोर
उपराष्ट्रपति ने भारत के सांख्यिकीय और प्रशासनिक आंकड़ा तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने डिजिटल डेटाबेस, जीएसटी आंकड़ों और उच्च आवृत्ति वाले आर्थिक आंकड़ों के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने डिजिटल लेन-देन में हुए विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे समानांतर अर्थव्यवस्था को कम करने में मदद मिली है।
उन्होंने आर्थिक गणनाओं के लिए उपयुक्त आधार वर्ष और देश की वास्तविक विकास दर के सटीक आकलन को भी महत्वपूर्ण बताया। साथ ही कहा कि आर्थिक संकेतक मानव कल्याण की पूरी तस्वीर नहीं बताते। खुशहाली और जीवन की गुणवत्ता जैसे मानकों को भी विकास के आकलन में महत्व दिया जाना चाहिए।
ईमानदारी और निष्पक्षता को बताया जरूरी
उपराष्ट्रपति ने प्रशिक्षु अधिकारियों से पेशेवर और नैतिक सत्यनिष्ठा, राजनीतिक तटस्थता, गोपनीयता और निष्पक्षता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सांख्यिकी का वास्तविक मूल्य लोगों के विश्वास से तय होता है। इसलिए अधिकारियों को अपने दायित्वों का ईमानदारी और दक्षता के साथ निर्वहन करना चाहिए।
उन्होंने युवा अधिकारियों को निरंतर सीखने, क्षेत्रीय अनुभव हासिल करने और वरिष्ठों, सहकर्मियों तथा अधीनस्थों से सीखने की आदत विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने अधिकारियों से जिज्ञासु, मेहनती और नवाचार के प्रति खुले विचारों वाला बनने का आग्रह किया तथा पेशेवर स्वतंत्रता से समझौता नहीं करने की बात कही।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘विकास के लिए आंकड़े’ और आंकड़ा-आधारित निर्णय विकसित भारत@2047 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि 2026 बैच के अधिकारी भारतीय सांख्यिकी सेवा की उत्कृष्ट परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए ऐसी मजबूत आंकड़ा-व्यवस्था बनाने में योगदान देंगे, जिससे आम लोगों तक सरकारी योजनाओं का ठोस लाभ पहुंच सके।
इस अवसर पर सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग, डेटा गवर्नेंस के महानिदेशक श्री पी. आर. मेश्राम, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और प्रशिक्षु अधिकारी उपस्थित रहे।