ट्राइडेंट व्याख्यान माला में संजय सेठ का जोर, अगली पीढ़ी की क्षमता से मजबूत होगा भारत
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Trident Lecture Series
संजय सेठ ने तीनों सेनाओं के बेहतर तालमेल और एकीकरण पर जोर दिया।
स्वदेशी रक्षा उद्योग, सेमीकंडक्टर और उन्नत तकनीक को महत्वपूर्ण बताया।
विकसित भारत 2047 के लिए नवाचार आधारित सुरक्षा दृष्टिकोण पर चर्चा हुई।
New Delhi / रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने 1 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में आयोजित द्वितीय वार्षिक ट्राइडेंट व्याख्यान माला में राष्ट्र निर्माण के लिए अगली पीढ़ी की क्षमता का प्रभावी उपयोग करने पर जोर दिया। संयुक्त युद्ध अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने बदलते वैश्विक सुरक्षा परिवेश के बीच भारत की रक्षा तैयारियों, सैन्य तालमेल और आत्मनिर्भर रक्षा प्रणाली की आवश्यकता को रेखांकित किया।
अपने विशेष संबोधन में रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य में तीनों सेनाओं के बीच अंतर्संचालनीयता, एकीकरण और बेहतर समन्वय बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने नागरिक-सैन्य समन्वय को मजबूत करने तथा देश की रक्षा क्षमताओं को आत्मनिर्भर बनाने पर भी विशेष बल दिया।
श्री सेठ ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को लगातार मजबूत कर रहा है और आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, रक्षा बलों की प्रतिबद्धता, आधुनिक तकनीक को अपनाने और तीनों सेनाओं के बीच बढ़ते तालमेल ने एक सुरक्षित और सशक्त भारत की मजबूत नींव तैयार की है।
युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर जोर
रक्षा राज्य मंत्री ने भारत की युवा शक्ति को देश की सबसे बड़ी क्षमताओं में से एक बताते हुए कहा कि युवा रक्षा, उद्योग, स्टार्टअप, अंतरिक्ष, कृषि, तकनीक और खेल समेत विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की महत्वाकांक्षा अब केवल ‘मेक इन इंडिया’ तक सीमित नहीं है, बल्कि देश का लक्ष्य ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ बन चुका है। यह बदलाव भारत में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पादों और प्रौद्योगिकियों के निर्माण तथा उनके निर्यात की दिशा में बढ़ते कदम को दर्शाता है।
उन्होंने भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और स्वदेशी उद्योगों की बढ़ती भूमिका की सराहना की। भविष्य के युद्धों की बदलती प्रकृति को देखते हुए उन्होंने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और उन्नत तकनीकों में राष्ट्रीय क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
राष्ट्रीय सुरक्षा का दायरा हुआ व्यापक
चीफ ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने भी राष्ट्रीय सुरक्षा की बदलती परिभाषा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमाओं और भौगोलिक क्षेत्रों की रक्षा तक सीमित नहीं है। आर्थिक सुरक्षा, तकनीकी प्रतिस्पर्धा, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचे की सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और भ्रामक सूचनाओं से निपटना भी राष्ट्रीय सुरक्षा के महत्वपूर्ण हिस्से बन चुके हैं।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर सहित हाल के अभियानों का उल्लेख करते हुए समन्वित योजना और सैन्य तालमेल की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, बदलती युद्ध परिस्थितियों में संयुक्त योजना और विभिन्न क्षमताओं के प्रभावी इस्तेमाल से ही सुरक्षा चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।
बहु-क्षेत्रीय युद्ध और नई तकनीक पर चर्चा
व्याख्यान माला में भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। थल सेना उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल संदीप जैन, लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला (सेवानिवृत्त) और अन्य वक्ताओं ने असैन्य-सैन्य संयोजन, बहु-क्षेत्रीय युद्ध, उभरती प्रौद्योगिकियों, एकजुटता और सैन्य समन्वय जैसे विषयों पर चर्चा की।
वक्ताओं ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के संदर्भ में राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए दूरदर्शी, एकीकृत और नवाचार आधारित दृष्टिकोण की जरूरत पर जोर दिया। बदलती तकनीक और युद्ध की नई परिस्थितियों के बीच भारत की सैन्य एवं राष्ट्रीय क्षमताओं को लगातार उन्नत करने को महत्वपूर्ण बताया गया।
पुस्तक का भी हुआ विमोचन
कार्यक्रम के दौरान रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने “एन एरा इन ऑलिव ग्रीन: जनरल अनिल चौहान, ड्यूटी, लीडरशिप एंड लेगेसी” नामक पुस्तक का विमोचन भी किया।
द्वितीय वार्षिक ट्राइडेंट व्याख्यान माला का समापन एकीकृत रक्षा स्टाफ (सिद्धांत, संगठन और प्रशिक्षण) के उप प्रमुख वाइस एडमिरल राजेश धनखड़ के समापन भाषण के साथ हुआ। पूरे कार्यक्रम में भारत की भविष्य की रक्षा तैयारियों, आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता और तीनों सेनाओं के बीच बेहतर एकीकरण को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिखाई दिया।