भारत में विमान लीजिंग को बढ़ावा देने की पहल, राम मोहन नायडू की अध्यक्षता में पहली बैठक
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राम मोहन नायडू की अध्यक्षता में विमान लीजिंग समिति की पहली बैठक आयोजित हुई।
कराधान, वित्तपोषण और नियामकीय व्यवस्था को बेहतर बनाने पर चर्चा हुई।
आईएफएससी के माध्यम से 422 परिसंपत्तियां लीज पर दी गई हैं।
New Delhi / भारत के तेजी से विस्तार कर रहे विमानन क्षेत्र को मजबूत आधार देने के उद्देश्य से विमान लीजिंग और भुगतान के लिए धन की व्यवस्था से संबंधित उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) की पहली बैठक आयोजित की गई। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में भारत में मजबूत, विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी और पूर्वानुमेय विमान लीजिंग तथा वित्तपोषण तंत्र विकसित करने के उपायों पर व्यापक चर्चा हुई।
बैठक में नागरिक उड्डयन मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, वाणिज्य विभाग, डीजीसीए, आरबीआई और आईएफएससीए के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उद्योग संघों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। चर्चा का मुख्य उद्देश्य विमान लीजिंग क्षेत्र से जुड़े नियामकीय, वित्तीय और कर संबंधी मुद्दों का समाधान तलाशना रहा।
बैठक की शुरुआत करते हुए राम मोहन नायडू ने बताया कि पिछले वर्ष गिफ्ट सिटी में पहला विमान लीजिंग शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था। हितधारकों के सुझावों के आधार पर केप टाउन समझौते की पुष्टि और विमान वस्तुओं में हितों का संरक्षण कानून लागू किया गया। इस वर्ष आयोजित दूसरे विमान लीजिंग शिखर सम्मेलन में उद्योग जगत की ओर से उच्च स्तरीय समिति के गठन का सुझाव दिया गया था, जिसके बाद अब इसकी पहली बैठक हुई।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विमान लीजिंग एक स्थापित और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य कारोबार है। सरकार उपयुक्त कानूनी और नियामकीय उपायों के माध्यम से इस क्षेत्र से जुड़े जोखिमों को धीरे-धीरे कम करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने विमानन क्षेत्र के लिए बैंक ऋण के अधिक आवंटन की संभावनाएं तलाशने तथा विमान लीजिंग में तकनीकी और कौशल विकास के लिए संयुक्त उपक्रमों की पहचान करने का सुझाव दिया।
सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप आईएफएससी के माध्यम से अब तक 422 परिसंपत्तियों, जिनमें 250 विमान और 87 इंजन शामिल हैं, को लीज पर दिया गया है। इसके अलावा 474 लीजिंग समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
राम मोहन नायडू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का विमानन क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है। हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे का विस्तार हो रहा है, लेकिन विमानों की उपलब्धता अभी भी एक बड़ी चुनौती है। भारतीय एयरलाइनों के बेड़े में 85 प्रतिशत से अधिक विमान लीज पर लिए गए हैं, इसलिए मजबूत लीजिंग इकोसिस्टम की आवश्यकता महत्वपूर्ण है।
समिति ने विमान लीजिंग और वित्तपोषण के लिए अनुकूल वातावरण बनाने से जुड़े कई मुद्दों पर विचार किया। इनमें कराधान, नियामकीय ढांचा, वित्त की उपलब्धता और कारोबार में सुगमता प्रमुख रहे। विमानों के लिए रुपये में मूल्यांकित वित्तपोषण की संभावनाओं, जीएएआर की प्रयोज्यता को लेकर स्पष्टता और आयरलैंड के साथ दोहरे कराधान से बचाव समझौते के ढांचे की समीक्षा या पुनर्वार्ता की संभावना पर भी चर्चा हुई।
बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री ने नियामकीय, वित्तीय और कर संबंधी मुद्दों के समाधान के लिए समन्वित और समयबद्ध दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। समिति ने संबंधित मंत्रालयों, विभागों और हितधारकों के साथ परामर्श के आधार पर प्रस्तावित उपायों की समीक्षा करने पर सहमति जताई।
सरकार का लक्ष्य भारत में ऐसा विमान लीजिंग और वित्तपोषण तंत्र विकसित करना है, जो वैश्विक मानकों के अनुरूप और निवेशकों के लिए भरोसेमंद हो। इससे एयरलाइनों के लिए विमान हासिल करना और उनका वित्तपोषण आसान हो सकता है। विमानों की उपलब्धता बढ़ने से यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी और अधिक विकल्प मिलने की संभावना है। साथ ही, यह भारत को एक प्रमुख वैश्विक विमानन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।