जनजातीय होमस्टे को बढ़ावा, ITDS का बड़ा प्रशिक्षण अभियान
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आईटीडीसी और जनजातीय कार्य मंत्रालय की पहल से जनजातीय होमस्टे संचालकों को पेशेवर प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे सेवा गुणवत्ता और पर्यटक अनुभव बेहतर होगा।
होमस्टे मॉडल से जनजातीय क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और सतत पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
नई दिल्ली/ भारत में सामुदायिक पर्यटन को मजबूत बनाने और जनजातीय समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त करने के उद्देश्य से भारतीय पर्यटन विकास निगम (आईटीडीसी) ने जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से एक विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह कार्यक्रम राजधानी दिल्ली स्थित होटल सम्राट के कौटिल्य हॉल में आयोजित किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से आए जनजातीय होमस्टे संचालकों ने भाग लिया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनजातीय होमस्टे संचालकों को पेशेवर आतिथ्य सेवाओं का प्रशिक्षण देना, सेवा गुणवत्ता में सुधार करना और पर्यटकों को बेहतर अनुभव प्रदान करना है। कार्यक्रम के पहले चरण में अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और गुजरात से आए 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिन्हें आतिथ्य, प्रबंधन और ग्राहक सेवा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान “ट्राइबल होमस्टे-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट मैनुअल 2026” का भी विमोचन किया गया। यह मैनुअल आईएचएम अशोक द्वारा तैयार किया गया है, जो जनजातीय होमस्टे के विकास और संचालन के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शिका के रूप में काम करेगा। इसे हिंदी और गुजराती जैसी भाषाओं में भी उपलब्ध कराया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक इसकी पहुंच सुनिश्चित हो सके।
समारोह में मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पहल को देश के पर्यटन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया। अधिकारियों का कहना है कि आज के पर्यटक पारंपरिक होटलों के बजाय प्राकृतिक और शांत वातावरण में ठहरना पसंद कर रहे हैं। ऐसे में होमस्टे मॉडल एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रहा है, जो न केवल पर्यटकों को अनूठा अनुभव देता है, बल्कि स्थानीय समुदायों को आय का नया स्रोत भी प्रदान करता है।
आईटीडीसी की प्रबंध निदेशक ने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के देशभर में एक लाख होमस्टे स्थापित करने के विजन से प्रेरित है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत 1500 से अधिक प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे वे अपने-अपने क्षेत्रों में प्रशिक्षक बनकर इस मॉडल का विस्तार कर सकें।
इस पहल के माध्यम से जनजातीय कार्य मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय और अन्य संस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित कर एक ऐसा ढांचा तैयार किया जा रहा है, जो सतत पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ स्थानीय रोजगार के अवसर भी सृजित करेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कार्यक्रम जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने के साथ-साथ आर्थिक विकास को भी गति देगा। आने वाले समय में यह पहल देश के दूरदराज क्षेत्रों में पर्यटन आधारित आजीविका को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।