REAO भर्ती में फर्जीवाड़ा

Fri 30-Jan-2026,12:11 PM IST +05:30

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REAO भर्ती में फर्जीवाड़ा Reao-Recruitment-Fake-Disability-Candidates-Chhattisgarh
  • छत्तीसगढ़ REAO भर्ती में श्रवण बाधित श्रेणी से चयनित 13 अभ्यर्थी दस्तावेज सत्यापन से गायब, फर्जी प्रमाणपत्र का संदेह गहराया।

  • राज्य में पहले भी 153 से अधिक फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के मामले सामने आ चुके हैं, प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur/ छत्तीसगढ़ में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (REAO) भर्ती प्रक्रिया के दौरान एक गंभीर मामला सामने आया है। व्यापमं परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले 13 अभ्यर्थी मूल प्रमाणपत्र सत्यापन से पहले ही गायब हो गए। जैसे ही उन्हें दस्तावेज जांच के लिए बुलाया गया, सभी अभ्यर्थियों ने दूरी बना ली। इससे पहले से जताया जा रहा फर्जी प्रमाणपत्र का संदेह अब सही साबित होता नजर आ रहा है।

इन अभ्यर्थियों पर आरोप है कि उन्होंने स्वयं को श्रवण बाधित (बहरे) बताकर फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर चयन हासिल किया। इससे पहले 18 जनवरी को प्रकाशित एक रिपोर्ट में इस आशंका को उजागर किया गया था। प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए दोबारा मौका दिए जाने के बावजूद भी कोई अभ्यर्थी सामने नहीं आया, जिससे संदेह और गहरा गया।

राज्य सरकार के संचालनालय कृषि द्वारा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के 321 पदों पर सीधी भर्ती के लिए व्यापमं के माध्यम से परीक्षा आयोजित की गई थी। चयनित सूची में श्रवण बाधित श्रेणी के 14 अभ्यर्थियों को मूल प्रमाणपत्र जांच के लिए बुलाया गया था। इनमें से केवल एक उम्मीदवार उपस्थित हुआ, जबकि शेष 13 लगातार अनुपस्थित रहे।

मूल प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए गठित समिति ने इन 13 अभ्यर्थियों को प्रारंभिक तौर पर अपात्र घोषित कर दिया। साथ ही उन्हें 23 जनवरी तक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर दावा प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया गया था, लेकिन तय समयसीमा तक भी कोई भी अभ्यर्थी सामने नहीं आया। इसके बाद समिति ने स्पष्ट रूप से इन्हें अपात्र मानते हुए आगे की कार्रवाई की संस्तुति कर दी।

छत्तीसगढ़ दिव्यांग संघ के प्रदेश अध्यक्ष बोहित राम चंद्राकर ने कहा कि उन्हें पहले से ही इन अभ्यर्थियों के फर्जी होने की आशंका थी। अब जब वे जांच से फरार हो गए हैं, तो यह संदेह पूरी तरह पुख्ता हो गया है। उन्होंने मांग की कि ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और फर्जी प्रमाणपत्र जारी करने वालों की भी जांच हो।

गौरतलब है कि राज्य में अब तक 153 से अधिक ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हासिल की गई। कई मामलों में आरोपी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है। यह मामला एक बार फिर भर्ती प्रक्रियाओं में सख्त जांच की जरूरत को उजागर करता है।