भारत पर्व 2026 का उद्घाटन
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लाल क़िले में भारत पर्व का उद्घाटन, लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संविधानिक मूल्यों और सांस्कृतिक एकता पर दिया विशेष जोर।
भारत पर्व को आत्मनिर्भर भारत का सजीव उदाहरण बताते हुए पर्यटन, हस्तशिल्प और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती का संदेश।
Delhi/ गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर ऐतिहासिक लाल क़िले के प्रांगण में आयोजित भारत पर्व का उद्घाटन लोक सभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने किया। इस अवसर पर उन्होंने भारत पर्व को देश की आत्मा, लोकतांत्रिक मूल्यों और सांस्कृतिक विविधता की सशक्त अभिव्यक्ति बताया। श्री बिरला ने कहा कि यह आयोजन केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि संविधान, एकता और आत्मनिर्भर भारत के विचार को जन-जन तक पहुँचाने का सजीव माध्यम है।
भारत पर्व: संस्कृति और संविधान का संगम
लोक सभा अध्यक्ष ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की असली शक्ति उसके संविधान में निहित मूल्यों—लोकतंत्र, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—से आती है। भारत पर्व इन मूल्यों को कला, शिल्प, संगीत, व्यंजन और लोक परंपराओं के माध्यम से आम नागरिकों से जोड़ता है। यह उत्सव “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की भावना को सशक्त करता है और यह दर्शाता है कि लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब लोग अपनी विरासत से जुड़े रहते हैं।
आत्मनिर्भर भारत का जीवंत उदाहरण
श्री बिरला ने कहा कि भारत पर्व आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को जमीन पर उतारने वाला मंच है। हस्तशिल्प, हथकरघा, लोक कला और स्थानीय व्यंजनों के माध्यम से यह आयोजन कारीगरों, कलाकारों और छोटे उद्यमियों को सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराता है। ऐसे आयोजनों से पर्यटन को बढ़ावा मिलता है और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलती है।
युवाओं की भूमिका और नागरिक सहभागिता
लोक सभा अध्यक्ष ने विशेष रूप से युवाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि संस्कृति से जुड़कर युवा अपनी जड़ों को पहचानते हैं और नवाचार आधारित भविष्य की ओर बढ़ते हैं। भारत पर्व जैसे आयोजन युवाओं को राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम हैं, जिससे जिम्मेदार और जागरूक नागरिकों का निर्माण होता है।
समावेशिता और विविधता की झलक
भारत पर्व की सबसे बड़ी विशेषता इसकी समावेशिता है। यहाँ आगंतुक गणतंत्र दिवस समारोह की झलक, सशस्त्र बलों की प्रेरक प्रस्तुतियाँ, देश के विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक झाँकियाँ, रंग-बिरंगे हस्तशिल्प बाज़ार और अखिल भारतीय व्यंजनालय का अनुभव कर सकते हैं। यह आयोजन स्पष्ट करता है कि भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है।
कलाकारों और सशस्त्र बलों को सम्मान
श्री बिरला ने कलाकारों, लोक कलाकारों, शिल्पकारों और संगीतकारों को भारत की जीवंत परंपराओं का संरक्षक बताया। उन्होंने कहा कि उनका सृजन केवल कला नहीं, बल्कि पीढ़ियों तक मूल्यों और ज्ञान के हस्तांतरण का माध्यम है। साथ ही, उन्होंने सशस्त्र बलों को नमन करते हुए कहा कि उनकी प्रस्तुतियाँ सेवा, त्याग और देशभक्ति का प्रतीक हैं।
लाल क़िले का प्रतीकात्मक महत्व
लोक सभा अध्यक्ष ने लाल क़िले को भारत की सामूहिक स्मृति का प्रतीक बताते हुए कहा कि यही वह स्थल है जहाँ स्वतंत्रता के स्वप्न ने आकार लिया और आज यह सांस्कृतिक आत्मविश्वास के प्रदर्शन का मंच बना है।
समापन संदेश
अपने संबोधन के अंत में श्री बिरला ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे वर्ष भर भारत पर्व की भावना को जीवंत रखें—स्थानीय कला को अपनाकर, शिल्पकारों का सम्मान करके और लोकतांत्रिक मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में उतारकर।