MP स्कूल में कागज पर परोसा मिड डे मील
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
MP-School-Mid-Day-Meal-Served-On-Paper
मैहर जिले के शासकीय स्कूल में बच्चों को फटे और गंदे कागजों पर मिड डे मील परोसे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।
वीडियो वायरल होते ही जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी।
Maihar/ एक तरफ जहां पूरा देश गणतंत्र दिवस को उत्साह, सम्मान और राष्ट्रीय गौरव के साथ मना रहा था, वहीं मध्य प्रदेश के मैहर जिले से सामने आई एक तस्वीर ने सरकारी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यहां एक शासकीय स्कूल में बच्चों को मध्यान्ह भोजन थाली या पत्तल में नहीं, बल्कि फटे और गंदे कागजों पर परोसा गया। इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
मामला मैहर जिले के एक शासकीय स्कूल का है, जहां 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह के बाद बच्चों को मिड डे मील दिया गया। लेकिन भोजन परोसने का तरीका बेहद चौंकाने वाला था। बच्चों को जमीन पर बैठाकर उनके सामने रद्दी कागज बिछाए गए, जिन पर हलवा और पूरी परोसी गई। इन कागजों पर स्याही के निशान, फटे हिस्से और गंदगी साफ दिखाई दे रही थी।
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो किसी ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर डाल दिया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि सरकार बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य के लिए मिड डे मील जैसी महत्वाकांक्षी योजना चला रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात बेहद चिंताजनक हैं।
वायरल वीडियो के बाद जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला परियोजना समन्वयक विष्णु त्रिपाठी ने जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और जो भी व्यक्ति या अधिकारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शासकीय स्कूलों में मध्यान्ह भोजन के लिए आवश्यक राशि सरकार की ओर से दी जाती है, जबकि थाली-पत्तल, बैठने की व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाएं स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी होती हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि जब बजट उपलब्ध है, तो बच्चों को इस तरह अस्वच्छ परिस्थितियों में भोजन क्यों दिया गया।
यह घटना न केवल स्कूल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि मिड डे मील योजना की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो बच्चों के स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता दोनों को नुकसान पहुंच सकता है।