बरसोला कलां और सूरत नगर विकास से कोसों दूर, सड़क न बनने पर ग्राम प्रधानों पर भेदभाव और भ्रष्टाचार के आरोप
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Lakhimpur Kheri News
बरसोला कलां व सूरत नगर में 10 साल से सड़क निर्माण नहीं.
ग्राम प्रधानों पर भेदभाव और टालमटोल के आरोप.
सड़क न होने से बच्चों को स्कूल जाने में परेशानी.
Nighasan / तिकुनियां, खीरी से सामने आई यह तस्वीर ग्रामीण विकास की जमीनी हकीकत को उजागर करती है। निघासन ब्लॉक की ग्राम पंचायत बरसोला कलां और सूरत नगर आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित नजर आ रही हैं। ग्रामीणों, खासकर महिलाओं का आरोप है कि पिछले करीब दस वर्षों से मोहल्ले की सड़क नहीं बनाई गई है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। आरोप सीधे ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मोहम्मद मियां और ग्राम प्रधान विजय शंकर पर लगाए गए हैं, जिन पर जानबूझकर टालमटोल करने का आरोप है।
ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि जब भी सड़क निर्माण की मांग की जाती है, तो ग्राम प्रधान प्रतिनिधि साफ शब्दों में कह देते हैं कि इस मोहल्ले से उन्हें वोट नहीं मिले, इसलिए यहां विकास कार्य नहीं कराया जाएगा। इस कथित बयान से ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि खुला भेदभाव है। लोकतंत्र में वोट न मिलना विकास रोकने का आधार कैसे बन सकता है, यह सवाल अब गांव-गांव में गूंज रहा है।
सड़क न होने का सबसे ज्यादा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, बरसात हो या न हो, सड़क पर हमेशा पानी भरा रहता है। कीचड़ और गड्ढों के बीच बच्चों को स्कूल भेजना किसी जोखिम से कम नहीं है। कई बच्चे पानी और फिसलन के डर से स्कूल जाने से कतराने लगे हैं। महिलाओं का कहना है कि अगर किसी दिन कोई बड़ा हादसा हो गया, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
जब इस मामले में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि मोहम्मद मियां और ग्राम प्रधान विजय शंकर से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो हालात और भी निराशाजनक नजर आए। मोहम्मद मियां ने यह कहकर बात टाल दी कि वे किसी काम से लखीमपुर में हैं, जबकि ग्राम प्रधान विजय शंकर ने फोन उठाने के बाद बातचीत करना तक उचित नहीं समझा और कॉल काट दी। इससे ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार द्वारा विकास के लिए जारी बजट का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा और भ्रष्टाचार के चलते जनता परेशान है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि अगर प्रदेश सरकार विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रही है, तो फिर बरसोला कलां और सूरत नगर जैसे गांव आज भी क्यों पीछे छूटे हुए हैं। अब देखना यह है कि सोशल मीडिया पर खबर वायरल होने के बाद प्रशासन और आला अधिकारी इस मामले में संज्ञान लेते हैं या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।