पटना गर्ल्स हॉस्टल केस: कपड़ों पर मिले ‘स्पर्म’ का रहस्य, DNA टेस्ट से खुलेगा मौत का सच
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Patna Girl's Hostel Case
FSL रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों पर ह्यूमन स्पर्म की पुष्टि.
डीएनए जांच से आरोपियों की पहचान की उम्मीद.
शुरुआती जांच में लापरवाही पर दो SHO निलंबित.
Patna / पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की ताज़ा रिपोर्ट ने इस केस को पूरी तरह नई दिशा दे दी है। रिपोर्ट में छात्रा के कपड़ों पर ह्यूमन स्पर्म मिलने की पुष्टि हुई है, जिसके बाद पुलिस अब डीएनए जांच को इस मामले का सबसे बड़ा हथियार मान रही है। माना जा रहा है कि डीएनए प्रोफाइलिंग से यह साफ हो सकेगा कि कपड़ों पर मिले जैविक साक्ष्य किसके हैं और घटना के पीछे कौन लोग जिम्मेदार हैं।
यह मामला सामने आने के बाद पटना पुलिस की शुरुआती जांच पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। शुरुआत में पुलिस इस घटना को आत्महत्या मानकर फाइल बंद करने की तैयारी में थी, लेकिन परिजनों के लगातार विरोध और मीडिया में मामला उछलने के बाद जांच की दिशा बदली। इसी क्रम में पटना के एसएसपी ने लापरवाही बरतने के आरोप में कदमकुंआ और चित्रगुप्त थाना के एसएचओ को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई बताती है कि मामले में शुरुआती स्तर पर गंभीर चूक हुई थी।
कपड़ों से मिला अहम सबूत
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पीड़ित छात्रा के परिजनों ने 10 जनवरी 2026 को छात्रा के कुछ कपड़े पुलिस को सौंपे थे। परिवार का कहना था कि घटना के वक्त छात्रा ने यही कपड़े पहने थे। कानूनी प्रक्रिया के तहत इन कपड़ों को जांच के लिए FSL भेजा गया। शुक्रवार को आई रिपोर्ट में कपड़ों पर मानव स्पर्म की मौजूदगी की पुष्टि हुई, जिसने पूरे केस को झकझोर कर रख दिया।
अब FSL इन जैविक नमूनों की डीएनए प्रोफाइल तैयार कर रही है। पुलिस का कहना है कि सबसे पहले इस डीएनए प्रोफाइल का मिलान पहले से गिरफ्तार आरोपी से किया जाएगा। यदि मैच होता है, तो यह केस में निर्णायक सबूत साबित हो सकता है।
अब तक सिर्फ एक गिरफ्तारी
इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक केवल एक ही गिरफ्तारी हुई है। शंभू गर्ल्स हॉस्टल के मकान मालिक मनीष रंजन को पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस का कहना है कि सबसे पहले उसका डीएनए सैंपल लिया जाएगा और FSL रिपोर्ट से मिलान कराया जाएगा। वहीं, हॉस्टल संचालिका नीलम अग्रवाल और उनके दोनों बेटे अभी तक फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस अब इनके खिलाफ भी डीएनए जांच की तैयारी में जुटी है और जल्द ही इनके सैंपल लेने के लिए कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
परिजनों का आरोप: दबाने की कोशिश
छात्रा के परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद हॉस्टल प्रबंधन और स्थानीय पुलिस ने मिलकर मामले को दबाने की कोशिश की। उनका कहना है कि अगर समय रहते सही जांच होती, तो सच्चाई पहले ही सामने आ जाती। परिजनों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।
DNA टेस्ट बनेगा गेमचेंजर
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस केस में डीएनए जांच सबसे अहम कड़ी साबित हो सकती है। यदि कपड़ों पर मिले स्पर्म का डीएनए किसी आरोपी से मैच हो जाता है, तो यह न सिर्फ अपराध की पुष्टि करेगा बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि छात्रा की मौत आत्महत्या नहीं, बल्कि किसी गंभीर अपराध का नतीजा थी।
फिलहाल, पटना पुलिस का कहना है कि FSL की अंतिम डीएनए रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। इस रिपोर्ट के आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी। पूरे बिहार की नजरें अब इसी रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि यही रिपोर्ट इस रहस्यमयी मौत के पीछे छिपे सच को सामने ला सकती है।