दिल्ली सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: मृतकों की संख्या 6 हुई, रातभर चला रेस्क्यू अभियान

Mon 07-Sep-2026,04:20 PM IST +05:30

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दिल्ली सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा: मृतकों की संख्या 6 हुई, रातभर चला रेस्क्यू अभियान Delhi Satya Niketan Accident
  • सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई।

  • एनडीआरएफ, दिल्ली पुलिस और दमकल की टीमें राहत-बचाव अभियान में जुटी हैं।

  • बिल्डिंग मालिक और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी है।

Delhi / Delhi :

New Delhi / दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर ढही पांच मंजिला पीजी इमारत के मलबे में फंसे लोगों की तलाश रातभर जारी रही। हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। एम्स के मुताबिक, ट्रॉमा सेंटर में कुल 10 लोगों को लाया गया था, जिनमें पांच को अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत घोषित कर दिया गया। गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। तीन घायलों का इलाज जारी है, जबकि एक व्यक्ति को मामूली चोटों के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

यह हादसा मोती बाग-2 स्थित शिव मंदिर के पास हुआ। इमारत का इस्तेमाल पीजी हॉस्टल के रूप में किया जा रहा था और इसमें बड़ी संख्या में छात्र रहते थे। इमारत गिरने के बाद कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस और डीडीएमए की टीमें फायर टेंडर और कैट्स एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंचीं।

एनडीआरएफ की दो टीमें बचाव अभियान में जुटीं। मलबे में फंसे लोगों तक ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए सिलेंडर भेजे गए और खोजी कुत्तों की मदद से दबे लोगों की तलाश की गई। राहत अभियान के दौरान मलबे के अंदर फंसे कुछ लोगों के फोन आने की जानकारी भी सामने आई। बीजेपी विधायक अनिल शर्मा ने बताया कि कुछ लोग अंदर से फोन कर रहे थे और बचाव दल उनसे संपर्क बनाए हुए था।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी घटनास्थल पर पहुंचीं। उन्होंने बताया कि 11 लोगों को मलबे से निकाला गया है और सभी संबंधित एजेंसियां राहत-बचाव कार्य में लगी हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हादसे के लिए जो भी जिम्मेदार होगा, चाहे वह बिल्डिंग मालिक हो या कोई अधिकारी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, स्थानीय पूछताछ में सामने आया कि इमारत करीब 40 से 50 साल पुरानी थी। इसमें बेसमेंट के अलावा पांच ऊपरी मंजिलें थीं। घटना के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। मुख्यमंत्री के अनुसार भी बेसमेंट में खुदाई का काम चल रहा था, जिसके दौरान पिलर प्रभावित होने की बात सामने आई है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह की विस्तृत जांच अभी बाकी है।

दिल्ली पुलिस ने बिल्डिंग मालिक की जानकारी जुटाने और उसकी गिरफ्तारी की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। अतिरिक्त डीसीपी अभिमन्यु पोसवाल ने कहा कि लापरवाही का मामला दर्ज किया जाएगा। पुलिस के मुताबिक, बचाए गए एक बच्चे ने बताया था कि इमारत के अंदर करीब 15-16 बच्चे हो सकते हैं, हालांकि उस समय इसकी पुष्टि नहीं हुई थी।

हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने भी बचाव अभियान में हिस्सा लिया। कई लोग हाथों और उपलब्ध औजारों से मलबा हटाने में जुटे रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत गिरने से पहले तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और इसके बाद इलाके में धूल और धुआं फैल गया। एक स्थानीय छात्र ने दावा किया कि मलबे के अंदर से बच्चों के मदद के लिए पुकारने की आवाजें आ रही थीं।

घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने दुख जताया। प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। अमित शाह ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और एनडीआरएफ के महानिदेशक से बात कर स्थिति की जानकारी ली और राहत अभियान की समीक्षा की।

विपक्षी नेताओं ने भी हादसे पर चिंता जताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। राहुल गांधी ने छात्रों के लिए सुरक्षित हॉस्टल की जरूरत पर सवाल उठाए। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और अन्य नेताओं ने भी बिल्डिंग की सुरक्षा, पीजी संचालन और निर्माण कार्यों की जांच की मांग की है।

फिलहाल राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ हादसे की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी जारी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि पुरानी इमारत में चल रहे मरम्मत और बेसमेंट के काम की निगरानी किस स्तर पर हुई और सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं हुआ।