भारतीय नौसेना को मिलेंगे 20 स्वदेशी ECGNSS जैमर, रक्षा मंत्रालय ने 449 करोड़ रुपये के अनुबंध पर किए हस्ताक्षर

Wed 10-Jun-2026,08:46 PM IST +05:30

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भारतीय नौसेना को मिलेंगे 20 स्वदेशी ECGNSS जैमर, रक्षा मंत्रालय ने 449 करोड़ रुपये के अनुबंध पर किए हस्ताक्षर Indian Navy
  • भारतीय नौसेना के लिए 20 स्वदेशी ECGNSS जैमर खरीदे जाएंगे।

  • 449 करोड़ रुपये के रक्षा अनुबंध पर हस्ताक्षर।

  • आत्मनिर्भर भारत और समुद्री सुरक्षा को मिलेगा बड़ा बल।

Delhi / Delhi :

Delhi / भारत की समुद्री सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंत्रालय ने भारतीय नौसेना के लिए 20 उन्नत क्षमता वाले वैश्विक नेविगेशन उपग्रह प्रणाली (ECGNSS) जैमर की खरीद हेतु बेंगलुरु स्थित अकॉर्ड सॉफ्टवेयर एंड सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड (ASSPL) के साथ 449 करोड़ रुपये के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। इस सौदे की खास बात यह है कि इसमें कम से कम 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जाएगा, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान को नई मजबूती प्रदान करेगा।

नई दिल्ली में 10 जून 2026 को हुए इस समझौते पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। यह अनुबंध ‘बाय इंडिया-इंडिजिनसली डिजाइन्ड, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड’ श्रेणी के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य देश में विकसित और निर्मित रक्षा प्रणालियों को बढ़ावा देना है।

ईसीजीएनएसएस जैमर एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली है, जिसे विशेष रूप से दुश्मन के नेविगेशन और संचार तंत्र को प्रभावित करने के लिए विकसित किया गया है। यह प्रणाली शत्रु के जीएनएसएस रिसीवर द्वारा उपग्रह संकेतों की पहचान और ट्रैकिंग क्षमता को कमजोर कर सकती है। इसके अलावा, यह सिग्नल स्पूफिंग और भ्रामक जैमिंग जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग करके दुश्मन की सैन्य गतिविधियों को बाधित करने में सक्षम होगी।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक युद्ध में इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। समुद्र में संचालित युद्धपोतों को कई प्रकार के खतरों का सामना करना पड़ता है, ऐसे में यह नई प्रणाली भारतीय नौसेना के जहाजों को बहु-खतरे वाले वातावरण में सुरक्षित और प्रभावी ढंग से संचालन करने में मदद करेगी।

इस परियोजना से न केवल भारतीय नौसेना की युद्ध क्षमता में वृद्धि होगी, बल्कि देश के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। स्वदेशी तकनीक के इस्तेमाल से विदेशी उपकरणों पर निर्भरता कम होगी और घरेलू उद्योगों को उन्नत रक्षा प्रणालियों के विकास का अवसर मिलेगा।

सरकार लंबे समय से ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा दे रही है। इसी दिशा में यह अनुबंध एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। इससे देश की समुद्री सुरक्षा संरचना मजबूत होगी और भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में भी मदद मिलेगी।

कुल मिलाकर, 449 करोड़ रुपये का यह रक्षा सौदा भारतीय नौसेना की तकनीकी क्षमता को नई ऊंचाई देने के साथ-साथ भारत को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और मजबूत कदम साबित होगा।