राजनाथ सिंह का युवाओं को संदेश, डॉ. अंबेडकर के मंत्र से राष्ट्र निर्माण का आह्वान
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Lucknow News
राजनाथ सिंह ने युवाओं को डॉ. अंबेडकर के विचार अपनाने की सीख दी।
संवैधानिक तरीकों और लोकतांत्रिक मूल्यों को सामाजिक बदलाव का आधार बताया।
युवाओं से विकसित भारत 2047 और आत्मनिर्भर भारत में योगदान की अपील की।
New Delhi / रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 29 अगस्त 2026 को लखनऊ स्थित बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए डॉ. बी.आर. अंबेडकर के विचारों और संवैधानिक मूल्यों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने डॉ. अंबेडकर के मंत्र ‘शिक्षित हो, आंदोलन करो और संगठित हो’ का अर्थ समझाते हुए कहा कि ज्ञान हासिल करना, अन्याय के खिलाफ संवैधानिक तरीकों से आवाज उठाना और लोकतांत्रिक बदलाव के लिए एकजुट होना ही इसका मूल संदेश है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने संविधान सभा में अपने अंतिम भाषण में सामाजिक और आर्थिक उद्देश्यों को संवैधानिक साधनों के माध्यम से हासिल करने पर जोर दिया था। जब लोकतांत्रिक रास्ते उपलब्ध हों, तब हिंसा, अराजकता या असंवैधानिक तरीकों का सहारा लेना उचित नहीं है। उन्होंने डॉ. अंबेडकर की उस चेतावनी का उल्लेख किया, जिसमें ऐसे तरीकों को ‘अराजकता का व्याकरण’ कहा गया था।
राजनाथ सिंह ने विश्वविद्यालयों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों को ऐसे युवाओं का निर्माण करना चाहिए, जो न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे संवैधानिक आदर्शों से प्रेरित हों। उनके मुताबिक शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि सोचने, समझने और समस्याओं का समाधान करने की क्षमता विकसित करना भी है। शिक्षा युवाओं को यह समझ भी दे कि उनके ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज तथा राष्ट्र के हित में किस प्रकार किया जा सकता है।
उन्होंने डॉ. अंबेडकर के चरित्र और विनम्रता संबंधी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि ज्ञान और उपलब्धियां नैतिक मूल्यों तथा अच्छे आचरण पर आधारित होनी चाहिए। स्वामी विवेकानंद के विचारों का हवाला देते हुए रक्षा मंत्री ने युवाओं से केवल नौकरी पाने की कोशिश करने के बजाय रोजगार पैदा करने वाले, समस्याओं का समाधान करने वाले और सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनने का आह्वान किया।
बदलती दुनिया में लगातार सीखने पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और नई तकनीक तथा नवाचार युवाओं के सामने नए अवसर पैदा कर रहे हैं। ऐसे समय में निरंतर सीखना और नए कौशल हासिल करना बेहद जरूरी है। उन्होंने छात्रों से बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने और जीवनभर सीखने की प्रतिबद्धता बनाए रखने की अपील की।
राष्ट्र निर्माण में सामूहिक प्रयासों के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत प्रयास देश की प्रगति में योगदान दे सकते हैं, लेकिन एकजुट संकल्प विकास की गति को कई गुना बढ़ा सकता है। उन्होंने छात्रों से ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ काम करने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान देने का आह्वान किया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सफलता हमेशा अनुकूल परिस्थितियों में ही नहीं मिलती। कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए दृढ़ संकल्प, सहनशीलता और कड़ी मेहनत के जरिए चुनौतियों को अवसरों में बदला जा सकता है। उन्होंने पिछले एक दशक में आत्मनिर्भर भारत, सेमीकंडक्टर विनिर्माण, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, स्टार्टअप और विनिर्माण क्षेत्र में सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया।
अंतरिक्ष और नवाचार में भारत की प्रगति
राजनाथ सिंह ने भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश सीमित संसाधनों से मिशन शुरू करने की स्थिति से आगे बढ़कर मानव अंतरिक्ष उड़ान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसे उन्नत कार्यक्रमों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। निजी क्षेत्र और भारतीय अंतरिक्ष स्टार्टअप्स की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए उन्होंने प्रक्षेपण यानों और उपग्रह तकनीक में हो रही प्रगति को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में पिछले 12 वर्षों की प्रगति का भी उल्लेख किया। राजनाथ सिंह के अनुसार अनुसंधान एवं विकास पर खर्च बढ़ा है, राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू हुई है और भारतीय युवा अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड, स्टार्टअप तथा उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में अपनी क्षमता दिखा रहे हैं। उन्होंने भारत के वैश्विक नवाचार सूचकांक में बेहतर प्रदर्शन और दुनिया के प्रमुख स्टार्टअप इकोसिस्टम में शामिल होने का भी उल्लेख किया।
आर्थिक विकास के साथ सांस्कृतिक आत्मविश्वास जरूरी
रक्षा मंत्री ने कहा कि विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत की यात्रा को केवल आर्थिक विकास के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार आर्थिक शक्ति किसी देश को समृद्ध बनाती है, जबकि सांस्कृतिक आत्मविश्वास उसे महान बनाता है। उन्होंने भारतीय भाषाओं, ज्ञान परंपरा, संस्कृति और विरासत के संरक्षण तथा प्रोत्साहन पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आज भारत अपनी सभ्यता, संस्कृति और क्षमताओं में विश्वास रखने वाला राष्ट्र है। राजनाथ सिंह ने युवाओं से देश की पहचान और विरासत पर गर्व करने तथा भविष्य के प्रति विश्वास बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि ‘भारत में विश्वास’ की भावना ही ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों की सफलता के पीछे महत्वपूर्ण शक्ति है।
समारोह में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राज कुमार मित्तल सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।