दिल्ली SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 47.56 लाख नाम बाहर, 30 सितंबर तक दावा
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Delhi Sir
दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 47.56 लाख नाम फिलहाल बाहर हैं।
नाम छूटने पर 30 सितंबर 2026 तक दावा दाखिल किया जा सकता है।
अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित होगी।
Delhi / राजधानी दिल्ली की नई ड्राफ्ट मतदाता सूची ने चुनावी तस्वीर में बड़ा बदलाव किया है। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद जारी प्रारूप सूची में कुल 1,45,10,299 मतदाताओं में से 47,56,722 के नाम शामिल नहीं किए गए हैं। यानी करीब एक-तिहाई मतदाता फिलहाल ड्राफ्ट सूची से बाहर हैं। चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, SIR वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट स्तर पर दिल्ली में 33 प्रतिशत की कटौती सबसे अधिक बताई गई है।
97.53 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में
नई ड्राफ्ट सूची में दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों से कुल 97,53,577 मतदाताओं के नाम शामिल हैं। घर-घर जाकर किए गए सत्यापन के दौरान कुल मतदाताओं में से 67.18 प्रतिशत के गणना फॉर्म प्राप्त हुए और उनका डिजिटलीकरण किया गया। वहीं करीब 47.5 लाख मतदाताओं के फॉर्म नहीं मिल सके।
इन मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, दोहरे नाम और अन्य श्रेणियों में रखा गया है। इन कारणों से उनके नाम फिलहाल ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। संख्या के लिहाज से भी 47.56 लाख नामों का बाहर होना काफी बड़ा आंकड़ा है।
प्रतिशत के लिहाज से दिल्ली सबसे आगे
अन्य राज्यों से तुलना करें तो कर्नाटक में 4.46 करोड़ मतदाताओं में से करीब 1.07 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए थे। आंध्र प्रदेश में यह संख्या लगभग 44.89 लाख रही। हालांकि प्रतिशत के लिहाज से दिल्ली सबसे आगे बताई गई है। दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव में लगभग 29.64 प्रतिशत नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए।
चुनाव अधिकारियों के अनुसार दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग नौकरी, कारोबार और अन्य कारणों से लगातार एक स्थान से दूसरे स्थान पर आते-जाते रहते हैं। इसी वजह से सत्यापन के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के अनुपस्थित या स्थानांतरित पाए जाने की संभावना जताई गई है।
विधानसभा क्षेत्रों में सत्यापन की दर अलग-अलग
SIR प्रक्रिया के दौरान सभी विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता फॉर्म के सत्यापन और डिजिटलीकरण की दर समान नहीं रही। रोहिणी विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 83.43 प्रतिशत फॉर्म डिजिटल किए गए, जबकि तुगलकाबाद में यह दर केवल 52.15 प्रतिशत रही। इससे दोनों क्षेत्रों के बीच सत्यापन प्रक्रिया में बड़ा अंतर सामने आया।
दिल्ली में घर-घर जाकर SIR की प्रक्रिया 30 जून से शुरू होकर 17 अगस्त तक चली। बूथ स्तर के अधिकारियों ने मतदाताओं तक पहुंचकर गणना फॉर्म उपलब्ध कराए और प्राप्त फॉर्म को डिजिटल किया। जिन मतदाताओं के फॉर्म इस प्रक्रिया में प्राप्त नहीं हो सके, उनके नाम फिलहाल ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं किए गए हैं।
नाम छूटा है तो अभी मौका बाकी
ड्राफ्ट मतदाता सूची से नाम बाहर होने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता का नाम हमेशा के लिए हट गया है। ऐसे मतदाताओं को अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक दावा दाखिल करने का अवसर दिया गया है।
इसके लिए फॉर्म-6 और जरूरी दस्तावेज जमा किए जा सकते हैं। दावों और आपत्तियों की जांच के बाद नोटिस और निस्तारण की प्रक्रिया 29 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। इसके बाद 4 नवंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है।
इसलिए फिलहाल ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए 47.56 लाख नामों को अंतिम कटौती नहीं माना जा सकता। अगले चरण में दाखिल होने वाले दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद मतदाता सूची में बदलाव संभव है। दिल्ली के मतदाताओं के लिए अब सबसे जरूरी है कि वे ड्राफ्ट सूची में अपना नाम जांचें और नाम नहीं होने की स्थिति में निर्धारित समय सीमा के भीतर दावा दाखिल करें।