त्रि-सैन्य भविष्य आधारित युद्धकौशल पाठ्यक्रम का चौथा संस्करण संपन्न
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Future Warfare Course
चार सप्ताह का त्रि-सैन्य भविष्य आधारित युद्धकौशल पाठ्यक्रम संपन्न।
AI, क्वांटम तकनीक, साइबर और सूचना युद्ध पर हुआ मंथन।
पांचवां संस्करण 16 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक होगा।
New Delhi / हेडक्वार्टर इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (HQ IDS) के मार्गदर्शन और सेंटर फॉर जॉइंट वॉरफेयर स्टडीज (CENJOWS) के समन्वय में आयोजित ‘त्रि-सैन्य भविष्य आधारित युद्धकौशल पाठ्यक्रम’ का चौथा संस्करण 30 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में संपन्न हुआ। चार सप्ताह तक चले इस पेशेवर सैन्य शिक्षा और विचार-विमर्श कार्यक्रम में भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना के अधिकारियों के साथ सरकारी संगठनों, शिक्षा जगत, रक्षा उद्योग तथा रणनीतिक विचारकों ने भाग लिया।
पाठ्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भविष्य के युद्ध के बदलते स्वरूप को प्रभावित करने वाले उभरते रुझानों का अध्ययन और विश्लेषण करना था। इसमें प्रतिभागियों ने बदलते भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के साथ नई और उभरती प्रौद्योगिकियों के सैन्य प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर और संज्ञानात्मक युद्ध, सूचना युद्ध, स्वायत्त प्रणालियां तथा तकनीक आधारित युद्ध जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई। इसके अलावा भूमि, समुद्र, वायु और अंतरिक्ष में भविष्य के अभियानों, ग्रे-जोन अभियानों और बहु-क्षेत्रीय अभियानों से जुड़े पहलुओं पर भी विचार-विमर्श हुआ।
चार सप्ताह के दौरान प्रतिभागियों को वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों, नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, रक्षा उद्योग के प्रमुखों और विषय विशेषज्ञों के साथ संवाद का अवसर मिला। पाठ्यक्रम में व्याख्यान, विचार-मंथन सत्र, परिदृश्य निर्माण अभ्यास, संज्ञानात्मक युद्ध सिमुलेशन, क्षेत्रीय दौरे और प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों जैसे विभिन्न तरीकों का उपयोग किया गया। इसका उद्देश्य केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि भविष्य की सैन्य चुनौतियों के लिए रणनीतिक सोच और परिचालन दृष्टिकोण को मजबूत करना था।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने भी पाठ्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों के साथ बातचीत की। उन्होंने कार्यक्रम के बारे में उनकी राय जानी और भविष्य के संस्करणों में नए क्षेत्रों तथा अतिरिक्त विषयों को शामिल करने के संबंध में सुझाव मांगे। इस दौरान एकीकृत सैन्य व्यवस्था के तहत तीनों सेनाओं की परिचालन और कार्यात्मक क्षमताओं को और बेहतर बनाने के लिए नए और लीक से हटकर विचारों पर भी चर्चा हुई।
समापन समारोह में चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन के इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के प्रमुख एयर मार्शल तेजिंदर सिंह ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए। वहीं डिफेंस रिसर्च एंड इनोवेशन फाउंडेशन और आईआईटी रोपड़ के प्रबंध निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल एसएस महल (सेवानिवृत्त) ने प्रतिभागियों को ‘फ्यूचर वॉरफेयर में पीजी डिप्लोमा’ प्रदान किया।
पाठ्यक्रम के चौथे संस्करण ने भविष्य के युद्ध की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप सैन्य अधिकारियों को तैयार करने में संयुक्त सीखने, तकनीकी जागरूकता, रणनीतिक दूरदर्शिता और परिचालन तैयारी के महत्व को रेखांकित किया। कार्यक्रम ने विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों और तीनों सेनाओं के अधिकारियों को एक साझा मंच पर लाकर भविष्य की सैन्य चुनौतियों पर व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर दिया।
अब इस श्रृंखला का पांचवां संस्करण 16 नवंबर से 11 दिसंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा।