हाइड्रोजन मिशन को बढ़ावा: TDB ने स्वदेशी हाई-प्रेशर स्टोरेज तकनीक को समर्थन दिया
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टीडीबी और गुडलाइफ मोबिलिटी की साझेदारी से भारत में स्वदेशी उच्च दबाव हाइड्रोजन भंडारण तकनीक के विकास को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा।
यह परियोजना स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा, एयरोस्पेस और यूएवी जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की तकनीकी क्षमता बढ़ाएगी।
Madurai/ भारत की स्वच्छ ऊर्जा और हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने तमिलनाडु के मदुरै स्थित डीप-टेक स्टार्टअप गुडलाइफ मोबिलिटी प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस सहयोग का उद्देश्य स्वदेशी, उच्च दबाव वाली हाइड्रोजन भंडारण प्रणालियों के विकास और व्यावसायीकरण को बढ़ावा देना है।
भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के तहत कार्यरत प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने उन्नत कंपोजिट प्रौद्योगिकियों पर आधारित 700 बार वर्किंग प्रेशर वाली हाइड्रोजन स्टोरेज प्रणालियों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने हेतु गुडलाइफ मोबिलिटी के साथ समझौता किया है। यह परियोजना भारत में स्वच्छ ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन और उन्नत विनिर्माण को नई गति देगी।
गुडलाइफ मोबिलिटी एक उभरता हुआ डीप-टेक स्टार्टअप है, जो चतुर्थ और पंचम पीढ़ी की कम्पोजिट ओवररैप्ड प्रेशर वेसल्स (COPV) तकनीक पर काम कर रहा है। कंपनी ने हल्के, मजबूत और उच्च दबाव सहन करने वाले सिलेंडरों के क्षेत्र में स्वामित्व वाली बौद्धिक संपदा विकसित की है, जो हाइड्रोजन भंडारण से जुड़ी तकनीकी चुनौतियों का प्रभावी समाधान प्रदान करती है।
इस TDB समर्थित परियोजना के तहत मदुरै में एक उन्नत विनिर्माण इकाई स्थापित की जाएगी, जहाँ उच्च-प्रदर्शन कंपोजिट प्रेशर वेसल्स का उत्पादन किया जाएगा। इनका उपयोग हाइड्रोजन आधारित परिवहन, स्थिर ऊर्जा प्रणालियों, यूएवी, सीएनजी-सीबीजी भंडारण, तथा रक्षा और एयरोस्पेस जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में किया जाएगा।
TDB सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि हाइड्रोजन भारत की दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा रणनीति का अहम स्तंभ है। स्वदेशी उच्च दबाव भंडारण तकनीकों को समर्थन देना भारत में मजबूत हाइड्रोजन वैल्यू चेन के निर्माण के लिए आवश्यक है। उन्होंने इसे ऊर्जा सुरक्षा और आयात निर्भरता घटाने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
वहीं गुडलाइफ मोबिलिटी के संस्थापकों ने इस सहयोग को भारतीय नवाचारों के लिए वैश्विक अवसरों का द्वार खोलने वाला करार दिया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी भारत को हाइड्रोजन स्टोरेज टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ रक्षा और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में भी सशक्त बनाएगी।