बजट से पहले एमपी सरकार ने लिया 5 हजार करोड़ कर्ज
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मोहन सरकार ने बजट सत्र से पहले 5 हजार करोड़ का नया कर्ज लिया, कुल ऋण 67,300 करोड़ रुपये पहुंचा।
फरवरी में दूसरी बार बाजार से उधारी, जनवरी तक लिए गए 30 कर्ज बढ़कर 36 हुए।
Bhopal/ मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने बजट सत्र से ठीक पहले बाजार से 5 हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज उठाया है। इस ताजा उधारी के साथ प्रदेश पर कुल कर्ज का आंकड़ा बढ़कर लगभग 67,300 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह राशि तीन अलग-अलग किस्तों में ली गई, जिसका भुगतान भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से किया गया। बढ़ते कर्ज को लेकर प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है और विपक्ष ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं।
जानकारी के अनुसार, फरवरी माह में यह दूसरी बार है जब राज्य सरकार ने बाजार से ऋण लिया है। इससे पहले 4 फरवरी को 5,300 करोड़ रुपये का कर्ज लिया गया था। जनवरी 2026 तक सरकार कुल 30 बार ऋण ले चुकी थी, जो फरवरी के पहले दस दिनों में बढ़कर 36 तक पहुंच गया है। 3 फरवरी को तीन नए कर्ज लेने के बाद यह संख्या 33 हुई थी और अब फिर तीन किस्तों में नया ऋण जोड़ा गया है।
प्रदेश में बढ़ते कर्ज को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा की नीतियों के कारण मध्यप्रदेश “कर्ज प्रदेश” बन गया है। उनके अनुसार, रिजर्व बैंक की हालिया रिपोर्ट बताती है कि राज्य पर कुल कर्ज 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है और यह देश के कुल कर्ज का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा है।
कमलनाथ ने आरोप लगाया कि सरकार फिजूलखर्ची और इवेंट आधारित राजनीति पर धन खर्च कर रही है, जबकि आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रही है। उन्होंने कहा कि 2007 में प्रदेश पर लगभग 52 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था, जो अब कई गुना बढ़ चुका है।
हालांकि सरकार की ओर से तर्क दिया जाता रहा है कि विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए ऋण लेना आवश्यक होता है। बजट सत्र से पहले लिए गए इस नए कर्ज ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर बहस तेज कर दी है।