China-Bangladesh Relations: बांग्लादेश ने चीन से मांगा निवेश और विकास परियोजनाओं में सहयोग
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China-Bangladesh Relations
तारिक रहमान ने शी जिनपिंग से व्यापार, निवेश और विकास सहयोग पर चर्चा की।
बांग्लादेश ने चीन से निर्यात बढ़ाने और प्रमुख परियोजनाओं में सहयोग मांगा।
नई ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और AI जैसे क्षेत्रों में साझेदारी पर जोर।
Dhaka / बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपनी पहली आधिकारिक चीन यात्रा के दौरान बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को नई मजबूती देने पर जोर दिया। तीन दिवसीय यात्रा के दौरान उन्होंने चीन से व्यापार घाटा कम करने, बांग्लादेश के निर्यात को बढ़ावा देने और प्रमुख विकास परियोजनाओं के लिए सहयोग बढ़ाने का अनुरोध किया। इस यात्रा को दक्षिण एशिया की बदलती कूटनीतिक परिस्थितियों के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ हुई वार्ता में तारिक रहमान ने कहा कि बांग्लादेश अपने निर्यात में विविधता लाना चाहता है। उन्होंने चीन से अनुरोध किया कि वह बांग्लादेश के ताजे आम, कटहल, अमरूद, जलीय उत्पाद, कच्चे चमड़े, जूट उत्पादों और औषधीय वस्तुओं के आयात पर विचार करे। उनका कहना था कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन बेहतर होगा और बांग्लादेश के किसानों तथा उद्योगों को नया बाजार मिलेगा।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री रहमान ने यह भी कहा कि बांग्लादेश अपनी प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और औद्योगिक इकाइयों के आधुनिकीकरण के लिए चीन के सहयोग की अपेक्षा करता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, निवेश और वित्तीय सहायता से देश के औद्योगिक विकास को नई गति मिल सकती है।
चीन की ओर से भी सकारात्मक संकेत दिए गए। चीनी सरकार ने कहा कि वह बांग्लादेश से अधिक गुणवत्ता वाले उत्पादों का आयात करने, वहां निवेश बढ़ाने और नई ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।
इससे पहले प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच कई महत्वपूर्ण सहयोग समझौतों पर हस्ताक्षर हुए, जिनका उद्देश्य व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचे और तकनीकी सहयोग को बढ़ाना है।
बांग्लादेश वर्ष 2016 में चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का हिस्सा बना था। इसके बाद से चीन ने देश में सड़क, ऊर्जा, परिवहन और अन्य विकास परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, बांग्लादेश पर चीन का लगभग 6.2 अरब डॉलर का कर्ज है, जबकि एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB) ने भी उसे 2.3 अरब डॉलर का अतिरिक्त ऋण दिया है। दूसरी ओर, भारत की ओर से बांग्लादेश को लगभग 1.6 अरब डॉलर का ऋण दिया गया है।
विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की यह यात्रा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका रणनीतिक महत्व भी है। उनकी सरकार एक ओर चीन के साथ आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना चाहती है, वहीं दूसरी ओर भारत के साथ भी संतुलित और सकारात्मक संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रही है। यही वजह है कि इस दौरे को क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि चीन अब विदेशी परियोजनाओं में निवेश को लेकर पहले की तुलना में अधिक सतर्क हो गया है। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग यह संकेत देता है कि आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश, तकनीक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में नई संभावनाएं विकसित हो सकती हैं।