Crude Oil Update: अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद तेल की कीमतों में गिरावट

Wed 24-Jun-2026,03:48 PM IST +05:30

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Crude Oil Update: अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद तेल की कीमतों में गिरावट Global Oil Prices
  • अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट।

  • ब्रेंट क्रूड 76 डॉलर और WTI 72 डॉलर प्रति बैरल के करीब।

  • भारत सहित तेल आयातक देशों को मिल सकती है राहत।

Delhi / Delhi :

Delhi / अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के पहले दौर के बाद वैश्विक तेल बाजार में राहत देखने को मिली है। भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। ब्रेंट क्रूड का भाव 2 मार्च के बाद पहली बार 76 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जिससे दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में सकारात्मक संकेत मिले हैं।

बुधवार को कारोबार के दौरान अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 1.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75.75 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखाई दिया। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 1.68 प्रतिशत फिसलकर 71.98 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले कारोबारी सत्र की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 79 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी, लेकिन बातचीत के बाद बाजार का रुख बदल गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में आई यह गिरावट मुख्य रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सामान्य होते समुद्री यातायात और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद का परिणाम है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों को सीधे प्रभावित करता है।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों ने निवेशकों को यह भरोसा दिया है कि क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव की संभावना फिलहाल कम हो सकती है। यही कारण है कि तेल बाजार में जोखिम प्रीमियम घटा है और कीमतों पर दबाव बना है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे भी सकारात्मक दिशा में बढ़ती है तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है।

भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए यह स्थिति राहत देने वाली है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने से आयात बिल कम हो सकता है, जिससे महंगाई पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। साथ ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान वार्ता के शुरुआती सकारात्मक संकेतों ने वैश्विक तेल बाजार को राहत दी है। अब निवेशकों और तेल आयातक देशों की नजर अगले दौर की बातचीत पर टिकी है, क्योंकि इसके नतीजे भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा तय कर सकते हैं।