राजनाथ सिंह ने श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके से की मुलाकात, रक्षा और समुद्री सहयोग को नई मजबूती
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Rajnath Singh Sri Lanka Visit
राजनाथ सिंह ने श्रीलंका के राष्ट्रपति दिसानायके से द्विपक्षीय वार्ता की।
6 L70 वायु रक्षा तोपों के उन्नयन को लेकर समझौता हुआ।
भारत-श्रीलंका के NCC और राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालयों के बीच सहयोग बढ़ेगा।
Colombo / रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 9 सितंबर 2026 को कोलंबो में श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से मुलाकात की। तीन दिवसीय श्रीलंका दौरे पर पहुंचे रक्षा मंत्री की इस मुलाकात में भारत और श्रीलंका के बीच पारंपरिक रूप से सौहार्दपूर्ण संबंधों, आपसी विश्वास और बहुआयामी साझेदारी से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने दोनों देशों के विकास, जनकल्याण और क्षेत्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
बैठक के दौरान भारत और श्रीलंका के बीच ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंधों का भी उल्लेख हुआ। राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से राष्ट्रपति दिसानायके को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के नागरिक मजबूत ऐतिहासिक एवं सभ्यतागत संबंधों और जन-जन के बीच निरंतर आदान-प्रदान के आधार पर गहरी मित्रता साझा करते हैं।
भारत की सुरक्षा चिंताओं का सम्मान
राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने राजनाथ सिंह का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी पिछली मुलाकातों को याद किया। उन्होंने दोहराया कि श्रीलंका अपनी धरती का इस्तेमाल भारत के सुरक्षा हितों के प्रतिकूल किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने देगा। यह आश्वासन दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और आपसी विश्वास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दोनों पक्षों ने भारत और श्रीलंका को सभ्यतागत रूप से जुड़े करीबी पड़ोसी और समुद्री साझेदार बताया। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश अपने विकास और लोगों के कल्याण के साथ-साथ पूरे क्षेत्र में सुरक्षा, शांति और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सहयोग जारी रखेंगे।
चक्रवात के दौरान भारत की मदद के लिए आभार
राष्ट्रपति दिसानायके ने चक्रवात दितवाह के दौरान भारत की ओर से चलाए गए ‘सागर बंधु’ अभियान के तहत दी गई राहत सहायता के लिए आभार जताया। इसके अलावा श्रीलंका के विभिन्न हिस्सों में पुनर्निर्माण और पुनर्वास कार्यों को आसान बनाने के लिए भारत की ओर से दिए गए व्यापक पुनर्वास पैकेज की भी सराहना की गई।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत श्रीलंका का सबसे करीबी मित्र और पड़ोसी होने के नाते सहायता को कोई एहसान नहीं, बल्कि अपना कर्तव्य मानता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जरूरत के समय भारत भविष्य में भी श्रीलंका की सहायता करता रहेगा।
तीन बेली पुलों का वर्चुअल उद्घाटन
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने भारतीय रक्षा बलों द्वारा बनाए गए तीन बेली पुलों का वर्चुअल तौर पर उद्घाटन किया। ये पुल दोनों देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग और आपदा के समय बुनियादी ढांचे को तेजी से बहाल करने की क्षमता को दर्शाते हैं।
इसके साथ ही श्रीलंकाई वायु सेना के लिए छह एल70 वायु रक्षा तोपों के उन्नयन से संबंधित समझौता ज्ञापन का भी आदान-प्रदान हुआ। यह परियोजना भारत सरकार के अनुदान के तहत है। इन तोपों को पहले भारत ने श्रीलंकाई वायु सेना को उपलब्ध कराया था। इनके उन्नयन से श्रीलंका में महत्वपूर्ण परिसंपत्तियों की वायु रक्षा क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है।
एनडीसी और एनसीसी सहयोग को बढ़ावा
भारत और श्रीलंका के राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग को लेकर भी समझौता ज्ञापन हुआ। इसके माध्यम से दोनों संस्थानों के बीच ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान बढ़ेगा तथा शैक्षणिक संबंधों को और मजबूती मिलेगी।
वहीं, दोनों देशों के राष्ट्रीय कैडेट कोर यानी NCC के बीच सहयोग से संबंधित समझौते के जरिए युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम को औपचारिक रूप दिया जाएगा। इस कार्यक्रम के तहत श्रीलंका सहित विभिन्न देशों के NCC कैडेटों को हर साल नई दिल्ली आने और NCC गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलता है।
समुद्री साझेदारी पर बढ़ता जोर
राजनाथ सिंह ने अपनी यात्रा को दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने राष्ट्रपति दिसानायके की सरकार को सफलतापूर्वक दो वर्ष का कार्यकाल पूरा करने पर बधाई भी दी।
भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री साझेदारी दोनों देशों के संबंधों का अहम हिस्सा है। हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों की भौगोलिक निकटता को देखते हुए समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में राजनाथ सिंह की राष्ट्रपति दिसानायके के साथ बैठक को द्विपक्षीय रक्षा संबंधों के साथ-साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।