यूरोप में भीषण हीटवेव का कहर, फ्रांस में 1000 मौतें, कई देशों में टूटा तापमान रिकॉर्ड

Sun 28-Jun-2026,07:00 PM IST +05:30

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यूरोप में भीषण हीटवेव का कहर, फ्रांस में 1000 मौतें, कई देशों में टूटा तापमान रिकॉर्ड Europe Heatwave
  • फ्रांस में हीटवेव के चलते करीब 1000 अतिरिक्त लोगों की मौत।

  • स्पेन, जर्मनी, ब्रिटेन समेत कई देशों में तापमान ने रिकॉर्ड तोड़े।

  • जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप में बढ़ रही है भीषण गर्मी की घटनाएं।

Delhi / Delhi :

Delhi / यूरोप इस समय भीषण और रिकॉर्डतोड़ गर्मी की चपेट में है। कई देशों में तापमान ने दशकों पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि स्कूल बंद करने पड़े हैं, ट्रेन सेवाएं प्रभावित हुई हैं, सड़कें पिघलने लगी हैं और अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। सबसे चिंताजनक स्थिति फ्रांस में देखने को मिली है, जहां केवल चार दिनों के भीतर लगभग 1,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इनमें से करीब 85 प्रतिशत मृतक बुजुर्ग थे।

फ्रांस, स्पेन, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली, डेनमार्क, स्विट्जरलैंड और अन्य यूरोपीय देशों में तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। न्यूज एजेंसी एएफपी के अनुमान के अनुसार, रविवार को यूरोप के करीब 19 करोड़ लोगों को 35 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर हालात इतने खराब हैं कि सरकारों को रेड अलर्ट जारी करना पड़ा है।

ब्रिटेन में इस बार जून महीने की गर्मी ने पिछले 50 वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। दक्षिणी इंग्लैंड में तापमान 36.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। पहली बार लगातार तीन दिनों तक रेड वार्निंग जारी करनी पड़ी है। अत्यधिक गर्मी के कारण बिजली की मांग 45 वर्षों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। 1,000 से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं और रेलवे ट्रैक गर्मी से फैलने के कारण ट्रेनों की गति सीमित करनी पड़ी है।

स्पेन की स्थिति भी बेहद गंभीर बनी हुई है। एंडुजार क्षेत्र में तापमान 45.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि बिलबाओ शहर में जून महीने का सर्वकालिक रिकॉर्ड टूट गया। पिछले कुछ दिनों में गर्मी से 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। भीषण गर्मी और सूखे के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं और कई इलाकों को खाली कराना पड़ा है।

जर्मनी में भी इतिहास की सबसे भीषण गर्मी दर्ज की गई है। ड्रैविट्ज शहर में तापमान 41.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो देश का अब तक का सबसे अधिक तापमान है। कई सड़कों और राजमार्गों पर डामर पिघलने लगा है, जबकि कई सार्वजनिक कार्यक्रम और खेल प्रतियोगिताएं रद्द करनी पड़ी हैं।

फ्रांस में तापमान 44.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसे देश के इतिहास के सबसे गर्म दिनों में से एक माना जा रहा है। गर्मी के कारण 1,350 से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं और हजारों घर बिजली आपूर्ति बाधित होने से प्रभावित हुए हैं। वहीं इटली में रोम, मिलान और वेनिस सहित 18 शहरों में रेड हीट अलर्ट जारी किया गया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण यूरोप दुनिया के औसत तापमान की तुलना में अधिक तेजी से गर्म हो रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले वर्षों में ऐसी हीटवेव और अधिक बार आएंगी तथा ज्यादा समय तक बनी रहेंगी।

दिलचस्प बात यह है कि भारत में 40 से 45 डिग्री तापमान सामान्य गर्मी का हिस्सा माना जाता है, जबकि यूरोप में यही तापमान आपात स्थिति बन जाता है। इसकी मुख्य वजह वहां की भौगोलिक परिस्थितियां, भवन निर्माण शैली, अधिक नमी और लोगों के शरीर का कम तापमान का आदी होना है। भारत में लोग लंबे समय से गर्म मौसम के अनुकूल हैं, जबकि यूरोप के लिए इतनी भीषण गर्मी अब भी असामान्य और खतरनाक स्थिति मानी जाती है।

कुल मिलाकर, यूरोप की यह रिकॉर्डतोड़ हीटवेव केवल मौसम की घटना नहीं बल्कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों की गंभीर चेतावनी मानी जा रही है, जिसने पूरे महाद्वीप को चिंता में डाल दिया है।