निर्मला सप्रे की विधायकी पर संकट
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निर्मला सप्रे की विधायकी पर दल-बदल कानून के तहत विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र तोमर की सुनवाई से मध्य प्रदेश राजनीति में हलचल तेज।
कांग्रेस ने भाजपा में शामिल होने का आरोप लगाते हुए निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की।
Bhopal/ मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर दल-बदल को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। बीना से विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता को लेकर उठा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा सुनवाई की जा रही है, जो विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष में जारी है। सुनवाई के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की मौजूदगी ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दाखिल की गई शिकायत में कांग्रेस ने निर्मला सप्रे पर दल-बदल कानून के उल्लंघन का आरोप लगाया है। कांग्रेस का कहना है कि विधायक निर्मला सप्रे कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो चुकी हैं, इसके बावजूद वे विधायक पद पर बनी हुई हैं, जो संविधान और दलबदल विरोधी कानून के खिलाफ है।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने स्पष्ट कहा कि यह केवल राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक मामला है। उन्होंने बताया कि इस विषय में न्यायालय में भी याचिका दाखिल की जा चुकी है और अब विधानसभा अध्यक्ष की सुनवाई बेहद अहम है। कांग्रेस की मांग है कि यदि दल परिवर्तन की पुष्टि होती है तो निर्मला सप्रे की सदस्यता तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए।
पूरा विवाद 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान तब सामने आया, जब 2023 में कांग्रेस के टिकट पर चुनी गईं निर्मला सप्रे भाजपा नेताओं के साथ सार्वजनिक मंच साझा करती दिखाई दीं। इसके बाद से उनके राजनीतिक रुख को लेकर सवाल उठने लगे और कांग्रेस ने इसे खुला दल-बदल बताया।
अब विधानसभा अध्यक्ष के निर्णय पर प्रदेश की राजनीति की दिशा निर्भर करती नजर आ रही है। यदि सदस्यता रद्द होती है तो इसका असर न केवल बीना विधानसभा सीट बल्कि प्रदेश की सियासी समीकरणों पर भी पड़ेगा।